कोडरमा के डुमरी में न पक्की सड़क, न सुरक्षित रास्ता; जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर बच्चे
कोडरमा के जयनगर प्रखंड स्थित डुमरी गांव में सड़क न होने से ग्रामीण और बच्चे मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। ...और पढ़ें

जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर बच्चे
HighLights
डुमरी गांव में सड़क न होने से आवागमन बाधित।
रेलवे की चारदीवारी ने बंद किया एकमात्र रास्ता।
बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं।
रंजीत भारती, जयनगर (कोडरमा)। आज के दौर में जहां सुदूर ग्रामीण इलाकों तक विकास की पहुंच बनाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं कोडरमा जिले के जयनगर प्रखंड का डुमरी गांव अब भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है।
प्रखंड मुख्यालय से महज करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह गांव इन दिनों सड़क के अभाव में पूरी तरह टापू में तब्दील हो गया है। गांव तक पहुंचने के लिए न तो पक्की सड़क है और न ही आवागमन का कोई सुगम रास्ता।
मेड़ों के सहारे ही अपनी जिंदगी आगे बढ़ानी पड़ रही
ग्रामीणों को पगडंडियों और खेतों की मेड़ों के सहारे ही अपनी जिंदगी आगे बढ़ानी पड़ रही है। ग्रामीणों के अनुसार, पहले गांव तक पहुंचने के लिए एक कच्ची सड़क थी। लेकिन रेलवे की ओर से गत वर्ष की गई रेलवे ट्रैक की सुरक्षा के लिए तैयार की गई चारदीवारी किए जाने के बाद यह रास्ता भी बंद हो गया।
इसके बाद गांव तक आने-जाने का कोई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं कराया गया। स्थिति यह है कि जिन ग्रामीणों के पास चारपहिया वाहन हैं, उन्हें भी अपने वाहन दूसरे गांव में रिश्तेदारों के यहां खड़े करने पड़ते हैं।
बच्चों की पढ़ाई पर असर
गांव की आबादी करीब 900 है। यहां पहले एक नवसृजित प्राथमिक विद्यालय संचालित था। रेलवे की चारदीवारी के बाद विद्यालय को उत्क्रमित मध्य विद्यालय ककरचोली में मर्ज कर दिया गया। अब छोटे-छोटे बच्चों को खेतों की मेड़ों और पगडंडियों से होकर स्कूल पहुंचना पड़ता है।
बरसात के दिनों में यह रास्ता और भी जोखिम भरा हो जाता है। उच्च शिक्षा के लिए बच्चों की परेशानी और बढ़ जाती है। उन्हें नदी पार कर करीब पांच से छह किलोमीटर दूर उत्क्रमित मध्य विद्यालय सांथ अथवा परियोजना बालिका उच्च विद्यालय, जयनगर जाना पड़ता है। बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने पर बच्चों के लिए यह सफर बेहद मुश्किल हो जाता है। बच्चे पत्थर से पत्थर पर पैर रखते हुए नदी पार करते हैं और फिर पुल के सहारे स्कूल तक पहुंचते हैं।
आश्वासनों से उठ चुका भरोसा
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कई बड़े नेता रहते हैं, इसके बावजूद आज तक गांव की तस्वीर नहीं बदली। विधायक और सांसद से भी ग्रामीणों को अब उम्मीद नहीं रह गई है। उनका आरोप है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि सड़क और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन देते हैं, लेकिन चुनाव बीतने के बाद गांव की समस्या पर ध्यान नहीं दिया जाता।
ग्रामीण बाबूलाल यादव, सूर्यनारायण यादव, मुकेश यादव, राजेश रविदास, मुख्तार अंसारी, अनवर अंसारी समेत अन्य लोगों ने जिला प्रशासन से गांव तक आवागमन के लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि कम से कम बच्चों के स्कूल आने-जाने के लिए सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराया जाए, ताकि बारिश के दिनों में किसी अनहोनी की आशंका न रहे।
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