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कोडरमा में बालू घाट टेंडर का नहीं निकल रहा रास्ता, 9वीं बार भी खाली रहा ई-ऑक्सन; 28 करोड़ पर भी नहीं मिले ठेकेदार

Published: Thu, 10 Sep 2026 09:24 AM (IST)

कोडरमा में बालू घाटों के लिए नौवीं बार ई-ऑक्शन विफल रहा, जिससे सरकार को 28 करोड़ रुपये के राजस्व का ...और पढ़ें

कोडरमा में बालू घाटों का नौवीं बार ई-ऑक्शन विफल हुआ।

कोडरमा में बालू घाटों का नौवीं बार ई-ऑक्शन विफल हुआ।

जागरण संवाददाता, कोडरमा। बालू घाट टेंडर की नई व्यवस्था अब तक फ्लॉप साबित हो रही है। विभाग स्तर से 9वीं बार ई-ऑक्शन के प्रयास भी विफल हो गया। इस दौरान राजस्व 42 करोड़ रूपया से घटाकर 28 करोड़ कर दिया गया, बावजूद संवेदक रूचि नहीं दिखा रहें है।

गत 21 अगस्त से 5 सितंबर तक ई-ऑक्शन का समय निर्धारित था, लेकिन डीसी की अध्यक्षता वाली जिला निविदा समिति में निराशा हाथ लगी। एक भी घाट के लिए ठेकेदारों की भागीदारी नहीं रही। जिले में 33 बालू घाटों को अलग-अलग कर ई-ऑक्शन किया गया था। जबकि शुरूआत में सभी 33 घाटों को एक ग्रुप में रखकर 3 बार टेंडर जारी की गई थी।

फिर 10-10 बालू घाट के ग्रुप बनाकर दो बार, 4-4 घाट का ग्रुप बनाकर एक बार तथा सभी 33 घाटों को अलग-अलग कर तीन बार टेंडर निकाली गई, लेकिन संवेदकों की भागीदारी नहीं होने से विभाग की चिंता बढ़ रही है। बताया जा रहा है कि घाटों में बालू का अत्यधिक दर के कारण संवेदक रूचि नहीं दिखा रहें है।

सरकारी दर अधिक रहने से आ रही समस्या

बालू घाटों के सरकारीकरण में अत्यधिक दर मुख्य कारण के रूप में सामने आ रहा है। फिलहाल अवैध तरीके से लोगों को 22 से 2500 रूपये प्रति ट्रैक्टर बालू उपलब्ध हो पा रहा है। लेकिन टेंडर के बाद इसका दर में काफी बढ़ोतरी होगी।

सरकारी दर के अनुसार, प्रति सीएफटी बालू करीब 15 से 16 सौ रूपया राजस्व के रूप में देना होगा। इसके अतिरिक्त संवेदक एवं लेबर चार्ज को लेकर इसकी राशि काफी अधिक होगी।

14 करोड़ राशि घटा, फिर भी नहीं हो रही भागीदारी

पिछले डेढ़ वर्षों से बालू घाटों के ई-ऑक्शन का प्रयास सफल नहीं हो पा रहा है। इस दौरान 42 करोड़ से राशि घटाकर 28 करोड़ कर दी गई, फिर भी स्थिति यथावत है। पूर्व में 8 बार टेंडर निकाली गई, जिसमें 7 बार में एक भी घाट के लिए भागीदारी नहीं रही। चार घाटों में एक-एक संवेदक ने रूचि दिखाई थी, लेकिन सिंगल बिड के कारण अमान्य हो गया।

विकास कार्यों को लग रहा झटका

बालू का टेंडर नहीं होने से विकास कार्य का भुगतान भी अधर में लटका हुआ है। वर्तमान मे सरकार के निर्देश के अनुसार, विकास कार्यों में इस्तेमाल की जानेवाली खनिज मटेरियल के लिए ई-चालान जरूरी है। कोडरमा जिले में एक भी बालू घाट सरकार स्तर से संचालित नहीं है। ऐसे में ई-चालान मिलने की फिलहाल कोई संभावना नहीं है। लिहाजा विभिन्न विभागों मेें करोड़ों का बिल फिलहाल लटक गया है। 

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