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कोडरमा में पैसे के लिए प्रसूता और नवजात को 8 दिनों तक अस्पताल में बनाया बंधक, CS के दखल के बाद मिला डिस्चार्ज

Published: Fri, 09 Oct 2026 09:44 AM (IST)

कोडरमा के एक निजी क्लीनिक पर प्रसव के बाद बकाया भुगतान न करने पर प्रसूता और नवजात को 8 दिनों ...और पढ़ें

8 दिनों तक अस्पताल में बनाया बंधक (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

8 दिनों तक अस्पताल में बनाया बंधक (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

HighLights

  1. कोडरमा निजी क्लीनिक ने बकाया के लिए प्रसूता-नवजात को रोका।

  2. परिजनों ने सिविल सर्जन से शिकायत की, जांच की मांग।

  3. सिविल सर्जन के दखल के बाद प्रसूता-नवजात को मिली छुट्टी।

संवाद सहयोगी, कोडरमा। बकाया राशि का भुगतान नहीं करने पर प्रसव के बाद प्रसूता और नवजात को निजी क्लीनिक से डिस्चार्ज नहीं करने का मामला सामने आया है। जयनगर प्रखंड के योगियाटिल्हा निवासी प्रमोद चौधरी की पत्नी पूनी कुमारी का 30 सितंबर को कोडरमा स्थित राजा तालाब गली के अपेक्षा क्लीनिक में ऑपरेशन से प्रसव कराया गया था। 

स्वजन ने क्लीनिक प्रबंधन पर निर्धारित राशि से अधिक बिल बनाने और बकाया राशि जमा नहीं करने तक प्रसूता व नवजात को डिस्चार्ज नहीं करने का आरोप लगाया है। 

इलाज में 35 हजार रुपये खर्च होने की जानकारी 

स्वजनों के अनुसार, ऑपरेशन से पहले क्लीनिक के चिकित्सक डॉ.आशीष ने करीब 35 हजार रुपये खर्च होने की जानकारी दी थी। ऑपरेशन के दौरान 30 हजार रुपये जमा भी करा दिए गए। इसके बाद इलाज का कुल बिल 42 हजार रुपये बताया गया। 

स्वजनों का आरोप है कि प्रसव के आठ दिन बाद तक प्रसूता और नवजात को क्लीनिक से छुट्टी नहीं दी गई और कम से कम छह हजार रुपये जमा करने के बाद ही डिस्चार्ज करने की बात कही जा रही थी। मामले को लेकर स्वजन ने गुरुवार को सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार से शिकायत की। 

उन्होंने क्लीनिक और चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई करने तथा प्रसूता व नवजात को तत्काल डिस्चार्ज कराने की मांग की। आवेदन में 29 सितंबर की रात सदर अस्पताल में इलाज नहीं किए जाने और वहां के एक कर्मी पर निजी अस्पताल भेजने का आरोप भी लगाया है। 

उनका कहना है कि प्रसव पीड़ा होने पर वे पूनी कुमारी को सदर अस्पताल लेकर पहुंचे थे, लेकिन सुबह करीब चार बजे तक चिकित्सक ने उनकी जांच नहीं की। इसके बाद सदर अस्पताल के एक कर्मी की सलाह पर उन्हें निजी क्लीनिक ले जाना पड़ा।

आरोप निराधार: डॉ. आशीष

इस संबंध में चिकित्सक डॉ. आशीष ने कहा कि परिवार वालों का आरोप पूरी तरह से निराधार है। मरीज को काफी खराब हालत में लाया गया था। क्लिनिक में सुरक्षित प्रसव कराने के बाद उन्हें हर संभव सहयोग किया गया। इसके बाद मैं श्रीनगर के लिए निकल पड़ा। बाद में भुगतान को लेकर मामला सामने आया तो सिविल सर्जन के कहने पर उसे डिस्चार्ज कर दिया गया।

जांच के बाद होगी कार्रवाई : सीएस

मामले की जानकारी मिलने पर सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार ने तत्काल प्रसूता और नवजात को डिस्चार्ज कराने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि एक ओर सदर अस्पताल के कर्मी द्वारा निजी अस्पताल जाने की सलाह देने का आरोप है, वहीं दूसरी ओर निजी क्लीनिक में प्रसूता और नवजात को इतने दिनों तक रखना भी उचित नहीं है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर संबंधित दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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