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कोडरमा कोर्ट का बड़ा फैसला: जमीन विवाद में ब्रहमदेव महतो की हत्या के मामले में पिता-पुत्र को आजीवन कारावास

Published: Fri, 31 Jul 2026 06:53 AM (IST)Updated: Fri, 31 Jul 2026 07:02 AM (IST)

कोडरमा कोर्ट ने जमीन विवाद में ब्रह्मदेव महतो की हत्या के मामले में पिता-पुत्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर।

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर।

HighLights

  1. कोडरमा कोर्ट ने जमीन विवाद हत्या मामले में फैसला सुनाया।

  2. पिता महावीर महतो और पुत्र लाल बहादुर यादव दोषी करार।

  3. दोनों को आजीवन कारावास और पांच हजार जुर्माना।

संवाद सहयोगी, कोडरमा। कोडरमा के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामाकांत मिश्रा की अदालत ने जमीन विवाद में ब्रहमदेव महतो नामक एक व्यक्ति की हत्या के मामले में गुरुवार को अहम फैसला सुनाते हुए दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

अदालत ने सतगावां थाना क्षेत्र के राजाबर टोला पछियाडीह निवासी महावीर महतो (65) और उसके पुत्र लाल बहादुर यादव (27) को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद तथा पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

जुर्माना नहीं देने पर दोनों को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। यह मामला सतगावां थाना कांड संख्या 67/24 से संबंधित है। घटना के संबंध में मृतक की पत्नी दुलारी देवी ने 25 अगस्त 2024 की रात हुई।

घटना को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया था कि रात करीब 9:30 बजे वह अपने पति ब्रहमदेव महतो के साथ भोजन के बाद घर के बाहर सोने की तैयारी कर रही थीं। तभी उनके भैसुर महावीर महतो और उनके पुत्र लाल बहादुर यादव कुल्हाड़ी और लोहे की राड लेकर पहुंचे और ब्रहमदेव महतो पर जानलेवा हमला कर दिया।

दुलारी देवी ने बीच-बचाव का प्रयास किया, लेकिन आरोपियों के सामने बेबस हो गईं। आसपास के लोगों को बुलाकर लौटने पर उन्होंने अपने पति को मृत पाया। शोर सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने महावीर महतो को मौके पर ही पकड़ लिया, जबकि लाल बहादुर यादव फरार हो गया।

बाद में पुलिस ने उसे ढाब जंगल क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। प्राथमिकी में हत्या का कारण पुराना जमीन विवाद बताया गया था। अनुसंधान के दौरान पुलिस ने घटना में प्रयुक्त कुल्हाड़ी, लोहे की राड तथा आरोपियों के खून लगे कपड़े बरामद किए।

अदालत में पुलिस की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य और 11 गवाहों की गवाही निर्णायक साबित हुई। लोक अभियोजक प्रवीण कुमार सिंह ने अधिकतम सजा की मांग की, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता नवल किशोर ने अपनी दलीलें रखीं।

दोनों पक्षों की दलीलों, साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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