झारखंड की 120 साल पुरानी 3 सुरंगों का बदला स्वरूप, अब BOBRM रैक से हो रही कोयले की तेज ढुलाई
झारखंड के कोडरमा-गया रेलखंड पर 120 साल पुरानी गुरपा-गझंडी घाटी की तीन सुरंगों का आधुनिकीकरण किया गया है। अब इन ...और पढ़ें

HighLights
120 साल पुरानी गुरपा-गझंडी सुरंगों का आधुनिकीकरण किया गया।
BOBRM कोयला रैक परिचालन हेतु सुरंगों की ऊंचाई-चौड़ाई बढ़ी।
धनबाद से बिजली संयंत्रों तक कोयला ढुलाई में तेजी आई।
संवाद सहयोगी, झुमरीतिलैया (कोडरमा)। नई दिल्ली–हावड़ा ग्रैंड कॉर्ड रेलखंड के कोडरमा–गया सेक्शन में स्थित गुरपा–गझंडी घाटी की तीन ऐतिहासिक सुरंगें आधुनिक रेल परिचालन के लिहाज से महत्वपूर्ण बदलाव की गवाह बनी हैं।
करीब 120 साल पुरानी इन सुरंगों की ऊंचाई और चौड़ाई बढ़ाकर इन्हें आधुनिक बीओबीआरएम कोयला रैक के परिचालन के अनुकूल बनाया गया है।
पूर्व मध्य रेलवे ने आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के तकनीकी सहयोग से सुरंगों का पुनर्डिजाइन कराया। इससे इस पहाड़ी रेलखंड पर कोयले की ढुलाई के लिए एक नया रास्ता खुला है।
अब धनबाद के कोयला क्षेत्रों से बिजली संयंत्रों तक कोयले की आपूर्ति कम दूरी में करने और परिवहन समय बचाने में मदद मिलेगी।
ब्रिटिशकाल में बनीं तीनों सुरंगें
तीनों सुरंग की कुल लंबाई 1345 मीटर है। गुरपा–गझंडी घाट सेक्शन की तीनों सुरंगों का निर्माण ब्रिटिश शासनकाल में ग्रैंड कॉर्ड रेलमार्ग के विकास के दौरान हुआ था। रेलवे के दस्तावेजों के अनुसार, इनका निर्माण छह दिसंबर 1906 को पूरा हुआ था।
पहली सुरंग की लंबाई 496 मीटर, दूसरी की 454 मीटर और तीसरी की 395 मीटर है। इस तरह तीनों सुरंगों की कुल लंबाई 1345 मीटर यानी 1.345 किलोमीटर है। ये सुरंगें लगभग 22 किलोमीटर लंबे गुरपा–गझंडी पहाड़ी रेलखंड का हिस्सा हैं।
दुर्गम पहाड़ियों के बीच रेललाइन बिछाने के लिए उस समय इन सुरंगों का निर्माण बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती था। एक सदी से अधिक समय तक इनसे यात्री और मालगाड़ियां गुजरती रहीं। हालांकि, आधुनिक मालवाहक वैगनों के आकार और क्षमता के अनुरूप सुरंगों में बदलाव जरूरी हो गया था।
बीओबीआरएम रैक के लिए बढ़ाई गई ऊंचाई और चौड़ाई
पुरानी सुरंगों के सीमित आंतरिक आयाम आधुनिक बीओबीआरएम कोयला वैगनों के परिचालन में बाधा बन रहे थे। इन वैगनों की बनावट और आकार को देखते हुए सुरंगों के भीतर पर्याप्त जगह उपलब्ध कराना आवश्यक था।
इसके लिए पूर्व मध्य रेलवे ने आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के विशेषज्ञों की मदद से सुरंगों का तकनीकी आकलन कराकर पुनर्डिजाइन किया।
इसके बाद आवश्यक संरचनात्मक बदलावों के जरिए अंदर की ऊंचाई और चौड़ाई बढ़ाई गई। इस प्रक्रिया में सुरंगों की मजबूती और सुरक्षित रेल परिचालन को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण था।
24 जून को जीएम ने रवाना किया था बीओबीआरएम रैक
पूर्व मध्य रेलवे, हाजीपुर के महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने 24 जून को कोडरमा–गया रेलखंड के निरीक्षण के दौरान इस मार्ग से बीओबीआरएम कोयला रैक को रवाना किया था।
उन्होंने कहा था कि देश में ऊर्जा की बढ़ती मांग को देखते हुए बिजली संयंत्रों तक कम समय में अधिक कोयला पहुंचाना जरूरी है।
इस उद्देश्य से धनबाद रेल मंडल में कई विकास कार्य किए जा रहे हैं। बीओबीआरएम रैक के परिचालन से कोयला ढुलाई की क्षमता बढ़ाने और आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
धनबाद से बाढ़ तक दूरी और समय में होगी बचत
सुरंगों के अनुकूल बनने से धनबाद रेल मंडल के कोयला क्षेत्रों से बाढ़ और बरौनी स्थित एनटीपीसी बिजली संयंत्रों तक कोयला पहुंचाने में सुविधा हो रही है। धनबाद से बाढ़ तक परिवहन में लगभग 250 किलोमीटर तक की दूरी और करीब पांच घंटे की बचत हो रही है।
इससे खाली वैगनों की वापसी तेजी से हो सकेगी और उपलब्ध रैक का अधिक प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकेगा। नतीजतन, बिजली संयंत्रों तक कोयले की आपूर्ति में सुधार हुआ है।
गुरपा–गझंडी की तीनों सुरंगों का आधुनिकीकरण
ऐतिहासिक रेल बुनियादी ढांचे को नई जरूरतों के अनुरूप ढालने का उदाहरण है। इससे जहां मालगाड़ियों के परिचालन में आने वाली बाधा दूर हुई है, वहीं कोयला परिवहन को अधिक सुविधाजनक बनाने का रास्ता भी खुला है।
बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस रूट पर यात्री ट्रेनों की गति सीमा 160 किलोमीटर प्रति घंटा किए जाने की व्यवस्था में नहीं यह उपाय कारगर होगा।
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