सिमडेगा, जासं। हॉकी की नर्सरी के रूप में प्रसिद्ध व देश को ओलंपियन समेत तीन दर्जन से अधिक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी देने वाला सिमडेगा आज एक अदद सीनियर हॉकी अकादमी के लिए तरस रहा है। यही कारण है कि सबजूनियर व जूनियर वर्ग में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी सीनियर स्तर की प्रतियोगिता में पिछड़ जा रहे हैं। विडंबना यह है कि इस मुद्दे पर न तो किसी जनप्रतिनिधि ने और न ही विभाग के द्वारा सार्थक पहल की गई है।

सीनियर स्तर की प्रशिक्षण सुविधा से वंचित होने के कारण हॉकी खिलाड़ी हीन भावना से ग्रसित हो जाते हैं। इससे प्रतिभा का भी पलायन होता है। अगर विगत 5-6 वर्षों की बात करें तो भारतीय पुरुष हॉकी टीम में एकमात्र अभय एक्का का चयन हुआ है। वहीं दूसरी ओर सीनियर भारतीय महिला टीम में सलीमा टेटे का चयन हुआ है। गौरतलब है कि एक समय ऐसा दौर था जब भारतीय महिला हॉकी टीम में यहां के 4-5 खिलाड़ी शामिल होते थे।

जिले में हाल के वर्षों में एस्ट्रोटर्फ बना। इससे जूनियर खिलाडिय़ों के खेल में तो अपेक्षित सुधार हुआ, लेकिन सीनियर खिलाडिय़ों के लिए प्रशिक्षण की सुविधा का अभाव ही रहा। जिले में वर्तमान समय में जूनियर खिलाडिय़ों के लिए तीन ट्रेनिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं। इसमें जिला मुख्यालय में दो तथा कोलेबिरा प्रखंड के लचरागढ़ में एक केंद्र का संचालन हो रहा है।

दम तोड़ रही हैं प्रतिभाएं : मनोज

सीनियर हॉकी अकादमी खोले जाने के सवाल पर हॉकी सिमडेगा के महासचिव मनोज कोनबेगी ने कहा कि इसके लिए विभाग समेत मुख्यमंत्री के पास भी पत्राचार किया गया है। लेकिन इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई है। इसके कारण खिलाडिय़ों को मैदान में हार का सामना करना पड़ता है। इससे प्रतिभा मंजिल पाने से पूर्व ही दम तोड़ रही है। सीनियर हॉकी अकादमी के खुलने से खिलाडिय़ों को पूरा लाभ मिलता।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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