मुरली पहाड़ी : रजिया नदी से प्यास बुझा रहे कोयडीहा के ग्रामीण शीर्षक से खबर दैनिक जागरण में मंगलवार के अंक में छपने के बाद पेयजल एवं स्वच्छता विभाग हरकत में आया। मंगलवार को उपायुक्त के निर्देश पर विभाग के सहायक अभियंता मदन मोहन सिंह व कनीय अभियंता सुनील बाखला ने नावाडीह पंचायत के कोयडीहा ग्राम के नीचे टोला व नारायणपुर पंचायत के चरक पानी ग्राम के आदिवासी टोला में जांच की। दोनों ही अधिकारियों ने दोनों टोलों के ग्रामीणों से पूरी जानकारी ली।

कहां से पानी पिया जाता है, उसे भी अधिकारियों ने नदी पहुंच कर देखा। जिस समय अधिकारियों ने नदी का जायजा लिया उस वक्त भी महिलाएं नदी में बने चुआं से पानी ले जाने में जुटी थी। चरक पानी ग्राम के आदिवासी टोला की कुछेक महिलाएं यहां पानी लेने पहुंची थी। टीम गांवों में घूमकर पेयजल की व्यवस्था का जायजा लिया तो कुछ एक चापाकल आदिवासी टोला में मिला जिसमें पानी का स्तर काफी नीचे था। एक चापाकल के कई सामान गायब थे। कोयडीहा के नीचे टोला में भी यही हाल दिखा। यहां एक भी सरकारी चापाकल नहीं मिला। एक धार्मिक स्थान के पास नीचे टोला से ऊपर किसी सामाजिक संस्था की ओर से लगाया गया चापाकल मिला। इससे ऊपर टोला के लोग ही पानी लेते हैं। नीचे टोले के लोग उस भीड़भाड़ वाले चापाकल में पानी लेने नहीं पहुंचते। टीम को ग्रामीणों के विरोध का भी सामना करना पड़ा।

आदिवासी टोला के ग्रामीणों में महिलाएं काफी गुस्से में थीं। साफ शब्दों में कहा गया कि जब 3 वर्ष पूर्व उपायुक्त रमेश कुमार दुबे ने यहां की पेयजल व्यवस्था की जांच की थी और उन्होंने कहा था कि नदी में ही बोरिग करवा कर पेयजल की समुचित व्यवस्था की जाए पर इसका पालन अब तक नहीं हुआ।

बता दें कि उक्त गांव के लोग वर्षो से नदी का पानी ही पीते आ रहे हैं। इसमें चरक पानी ग्राम के आदिवासी टोला के 10 से 12 परिवार शामिल हैं वहीं कोयडीहा ग्राम के नीचे टोला के करीब 10 परिवार शामिल हैं। ग्रामीणों ने एक बार पुन: शीघ्र गांव में पेयजल की व्यवस्था कराने की मांग की है।

Posted By: Jagran

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