जामताड़ा : शिक्षकों की कमी से विद्यालय में ज्ञान सेतु योजना प्रभावित हो रही है। कमजोर बच्चों का चयन कर समूह बनाकर गणित, अंग्रेजी, हिदी, विज्ञान पढ़ाने की योजना अंजाम तक पहुंचाने में शिक्षकों को परेशानी हो रही है। मामला शैक्षणिक अंचल नारायणपुर के मध्य विद्यालय घांटी पांडेयडीह का है, जहां बच्चों की संख्या 182 है जबकि इन्हें पढ़ाने के लिए केवल चार शिक्षक ही हैं। पहली कक्षा से 8वीं कक्षा तक के कमजोर बच्चों के अधिगम स्तर को बढ़ाने के लिए सरकार ज्ञान सेतु योजना के तहत विद्यालय में पठन-पाठन कार्य प्रारंभ करवाई है।

इस योजना के तहत अगस्त से विद्यालय में 45 दिनों के लिए पठन-पाठन कार्य प्रारंभ हुआ है। शिक्षा विभाग के निर्देश पर विद्यालय प्रबंधन ने बच्चों के छह समूह का निर्माण कर पठन-पाठन का कार्य आरंभ तो कर दिया लेकिन छह समूह को पढ़ाने के लिए कम से कम छह शिक्षकों की आवश्यकता है।  चार शिक्षक एक बार में  चार समूह को ही पढ़ा सकते हैं दो समूह को बैठकर समय गुजारना पड़ता है। शिक्षकों की कमी के कारण ज्ञान सेतु पाठ्यक्रम पर विद्यालय में बुरा प्रभाव पड़ रहा है। जिस पाठ्यक्रम को 45 दिन में पूरा करने का लक्ष्य है शिक्षकों के कमी से वह कितने दिन में पूरा होगा इसका अनुमान शिक्षा विभाग लगा सकती है।

हालांकि विद्यालय प्रबंधन बच्चों का वक्त जाया नहीं करते हुए संयुक्त समूह बनाकर ज्ञान सेतु का पाठ्यक्रम का अध्यापन कार्य करते हैं लेकिन यह तो एक समस्या ही है।

ज्ञात हो कि सरकार के एक अध्ययन में यह विषय सामने आया था अभी भी सरकारी विद्यालयों में कक्षा  पांच, छह, सात के बच्चे कक्षा दो-तीन के प्रश्न का हल नहीं कर पाते हैं अर्थात अब भी उच्च कक्षाओं के बच्चों का ज्ञान स्तर काफी नीचे है। सभी बच्चों का ज्ञान स्तर बढ़ाने के लिए इस योजना को सरकार ने एक संयुक्त पाठ्यक्रम तैयार कर बच्चों के बीच पढ़ने के लिए लाई है। यह योजना वर्ष 18 से ही प्रारंभ हुई है। इसके तहत जो तीन समूह बनने हैं उन तीन तरह के समूह को शिक्षक 45 दिन पूरे विद्यालय समय में ज्ञान सेतु पाठ्यक्रम का कार्य पत्रिका एक-एक विद्यार्थी से हल करवाएंगे। 45 दिन के पश्चात अंतिम सत्र तक प्रतिदिन डेढ़ घंटे का एक विशेष कक्षा आयोजित होगा। इस महत्वपूर्ण योजना संचालन में शिक्षकों की कमी बाधा पहुंचा रही है यदि अनिवार्य व निश्शुल्क बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 पर ध्यान दिया जाय तो यहां प्रत्येक 30 बच्चे में एक शिक्षक की आवश्यकता है। नियमत: कम से कम इस विद्यालय में छह शिक्षक होना चाहिए। यदि समय रहते विद्यालय में शिक्षकों का पदस्थापन नहीं हुई तो बच्चों का पठन-पाठन आगे भी इसी तरह प्रभावित रहेगा।

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ज्ञान सेतु के माध्यम से जैसे शिक्षा देने की बात प्रशिक्षण में हासिल हुई थी हमलोग उसी पद्धति से बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। यहां शिक्षक की कमी है इसलिए इस योजना पर थोड़ा बहुत प्रभाव पड़ रहा है।

दिनेश करमाली, शिक्षक

Posted By: Jagran

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