जमशेदपुर, (मनोज सिंह)। हाथियों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक वर्ष 12 अगस्त को विश्व हाथी दिवस के रूप में मनाया जाता है। हाथी के लिए दलमा को संरक्षित घोषित किया गया है। यही कारण है कि प्रत्येक वर्ष दलमा के अंदर रहने वाले 85 गांव के लोगों को जागरूक करने के लिए हाथी दिवस मनाया जाता है। दलमा के डीएफओ सह गज परियोजना के उप निदेशक डा. अभिषेक कुमार कहते हैं कि हाथियों के बारे में आम जनता के बीच फैल रहे गलत धारणा को दूर करते हैं। लोगों के बीच यह अवधारणा बन गई है कि हाथी जंगल में रहने वाले लोगों का जान-माल का नुकसान पहुंचाता है। उप निदेशक डा. अभिषेक कुमार कहते हैं कि लोगों को समझाया जा रहा है कि हाथी हमारे दुश्मन नहीं बल्कि हमारे साथी हैं। हाथी मनुष्य के साथ ही पर्यावरण के प्रहरी है। उन्होंने बताया कि दलमा में आज के समय 84 हाथियों के झुंड विचरण कर रहे हैं, जोकि सुखद है।

हाथियों के मौत सबसे बड़ी चिंता का कारण

गज परियोजना के उप निदेशक डा. अभिषेक कुमार कहते हैं कि विश्व हाथी दिवस मनाने का एक और उद्देश्य है। हाथियों के मौत को रोकना। आए दिन सुनने को मिलता है कि रेल से कटकर हाथी की मौत हो गई, कहीं जानबूझ कर हाथियों को मारा जाता है। यही कारण है कि हाथियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए विश्व हाथी दिवस मनाया जाता है।

हाथियों के बारे में रोचक बातें जानकार रह जाएंगे आश्चर्य

दलमा के डीएफओ डा. अभिषेक कुमार कहते हैं कि हाथियों के तीन प्रजातियां होती है। अफ्रीका के सवाना के जंगल में पाए जाने वाले हाथी, अफ्रीका के जंगलों में पाए जाने वाले हाथी तथा भारत समेत अन्य एशियाई देशों में पाए जाने वाले हाथी। अफ्रीका में पाए जाने वाले हाथियों का वजन 4000 से 7000 किलो तक होता है जबकि एशिया के में पाए जाने वाले हाथी का वजन 3000 से 6000 किलो के बीच होता है। हाथी एक दिन में 300 से 400 किलो खाना खाती है। जबकि एक दिन में 160 लीटर पानी का सेवन करता है।

Edited By: Madhukar Kumar