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World Chocolate Day: चॉकलेट खाने से पहले जान लें ये सच; डार्क, मिल्क या व्हाइट, कौन सी है सेहत की सहेली?

Published: Tue, 07 Jul 2026 08:00 AM (IST)Updated: Tue, 07 Jul 2026 09:24 AM (IST)

विश्व चॉकलेट दिवस पर डायटीशियन अन्नू सिन्हा ने बताया कि डार्क, मिल्क और व्हाइट चॉकलेट में से सेहत के लिए कौन सी बेहतर है।

चॉकलेट की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

चॉकलेट की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

HighLights

  1. डार्क चॉकलेट हृदय स्वास्थ्य और रक्त संचार के लिए सबसे बेहतर विकल्प।

  2. 70% से अधिक कोको वाली डार्क चॉकलेट सीमित मात्रा में ही खाएं।

  3. मिल्क और व्हाइट चॉकलेट में चीनी, फैट अधिक, सेहत के लिए हानिकारक।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। विश्व चॉकलेट दिवस (World Chocolate Day) के मौके पर हर तरफ मिठास का माहौल है। चॉकलेट का नाम सुनते ही बच्चों से लेकर बड़ों तक के चेहरे खिल उठते हैं। 
 
जन्मदिन, त्योहार या कोई भी खास मौका हो, चॉकलेट आज सबसे पसंदीदा तोहफा बन चुकी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्वाद के चक्कर में आप अपनी सेहत के साथ कैसा समझौता कर रहे हैं?
 
एमजीएम (MGM) मेडिकल कॉलेज अस्पताल की डायटीशियन अन्नू सिन्हा के अनुसार, डार्क, मिल्क और व्हाइट चॉकलेट का पोषण मूल्य, कोको की मात्रा, चीनी और फैट का स्तर बिल्कुल अलग होता है। इसलिए चॉकलेट का चुनाव सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि सेहत को देखकर करना चाहिए।
 

डार्क चॉकलेट क्यों है सबसे बेहतर?

डार्क चॉकलेट में कोको सॉलिड्स की मात्रा सबसे अधिक होती है। इसमें भरपूर मात्रा में फ्लेवोनॉइड्स और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो:

  •     हृदय स्वास्थ्य (Heart Health) को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं।
  •     शरीर में रक्त संचार (Blood Circulation) में सुधार लाते हैं।
  •     बॉडी को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाते हैं।
डायटीशियन के मुताबिक, 70 प्रतिशत या उससे अधिक कोको वाली डार्क चॉकलेट को अगर सीमित मात्रा में खाया जाए, तो यह अन्य चॉकलेट्स के मुकाबले एक बेहतरीन और सेहतमंद विकल्प है।
 

मिल्क और व्हाइट चॉकलेट से क्यों रहें सावधान?

  •     मिल्क चॉकलेट: इसमें कोको की मात्रा काफी कम होती है, जबकि दूध, चीनी और फैट का स्तर बहुत ज्यादा होता है। यही वजह है कि यह ज्यादा मीठी और हाई कैलोरी वाली होती है।
  •     व्हाइट चॉकलेट: इसमें कोको सॉलिड्स बिल्कुल नहीं होते। यह सिर्फ कोको बटर, दूध और चीनी के मिश्रण से बनती है।


इन दोनों ही चॉकलेट्स में एंटीऑक्सीडेंट न के बराबर होते हैं। इनका अत्यधिक सेवन वजन बढ़ाने, दांतों में कैविटी और ब्लड शुगर लेवल को अनियंत्रित करने का बड़ा कारण बन सकता है। इसलिए अगली बार जब चॉकलेट खरीदें, तो उसके रैपर पर न्यूट्रिशन वैल्यू चेक करना न भूलें।

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चाकलेट खरीदते समय उसके पैकेट पर कोको प्रतिशत, शुगर और फैट की मात्रा जरूर देखनी चाहिए। बच्चों और बड़ों दोनों के लिए चाकलेट का सेवन सीमित मात्रा में ही उचित है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और नियंत्रित मात्रा में चाकलेट का सेवन ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।

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अन्नू सिन्हा, डायटीशियन, एमजीएम

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