जमशेदपुर, जासं।  कंफडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने वाट्सएप के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। जिसमें कंपनी द्वारा आठ फरवरी 2021 से प्रभावी किए जाने वाली गोपनीयता नीति को खारिज करने की मांग की गई है। 

कैट के राष्ट्रीय सचिव सुरेश सोंथालिया का कहना है कि भारतीय संविधान से हर नागिक को विभिन्न मौलिक अधिकार प्राप्त है। लेकिन विदेशी कंपनी की नई नीति नागरिकों को मिले मौलिक अधिकारों पर अतिक्रमण है। ऐसे में कैट ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वाट्सएप जैसी बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों को संचालित करने के लिए केंद्र सरकार को दिशा-निर्देश तैयार करने का आदेश दे।

गोपनीयता की रक्षा का बने कानून

केंद्र सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो नागरिकों और व्यवसायों की गोपनीयता की रक्षा कर सके। याचिका में विशेष रूप से यूरोपीय संघ और भारत जैसे देशों में वाट्सएप की गोपनीयता नीति पर रोक लगाने की मांग की। कैट का कहना है कि इससे भारतीय उपयोगकर्ताओं के डेटा का इस तरह की बड़ी तकनीकी कंपनियों द्वारा दुरुपयोग कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट में दायर इस याचिका को अधिवक्ता अबीर रॉय द्वारा तैयार किया गया है जिसे एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड विवेक नारायण शर्मा द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर किया गया।

वाट्सएप का रवैया मनमाना: सोंथालिया

 कैट के राष्ट्रीय सचिव सुरेश सोंथालिया ने आरोप लगाया कि वाट्सएप ने ‘माई वे या हाई वे ’के दृष्टिकोण को अपनाया है जो मनमाना, अनुचित और असंवैधानिक है। इसे भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में स्वीकार नहीं किया जा सकता है। वाट्सएप कंपनी व्यक्तिगत उपयोगकर्ता के डेटा को धोखे से इकट्ठा कर रहा है। भारत में अपने लॉन्च के समय वाट्सएप ने उपयोगकर्ताओं को उपयोगकर्ता डेटा और मजबूत गोपनीयता सिद्धांतों को साझा न करने के वादे के आधार पर आकर्षित किया।

2014 में ही शुरू हो गया था संदेह

2014 में फेसबुक द्वारा वाट्सएप के अधिग्रहण के बाद जब उपयोगकर्ताओं ने अपने डेटा की गोपनीयता पर संदेह करना शुरू कर दिया था। क्योंकि उन्हें भय था कि उनके व्यक्तिगत डेटा को फेसबुक के साथ साझा किया जाएगा तो व्हाट्सएप ने वादा किया कि अधिग्रहण के बाद गोपनीयता नीति में कुछ भी नहीं बदलेगा। हालांकि, अगस्त 2016 में वाट्सएप अपने वादे से पीछे हट गया और एक नई गोपनीयता नीति पेश की। जिसमें उसने अपने उपयोगकर्ताओं के अधिकारों से गंभीर रूप से समझौता किया और उपयोगकर्ताओं के गोपनीयता अधिकारों को पूरी तरह से कमजोर कर दिया। नई गोपनीयता नीति के तहत, इसने वाणिज्यिक विज्ञापन और मार्केटिंग के लिए फेसबुक और इसकी सभी समूह कंपनियों के साथ व्यक्तिगत डेटा साझा किया। तब से कंपनी अपनी नीतियों में बदलाव कर रही है, ताकि सूचनाओं की एक विस्तृत श्रृंखला को इकट्ठा और संसाधित किया जा सके और तीसरे पक्ष को डाटा दिया जा सके। कैट किसी भी कॉर्पोरेट या बड़ी विदेशी कंपनी को भारत के लोगों के कंधे पर बंदूक रख अनैतिक तरीके से लाभ कमाने के लिए अपनी अप्रिय नीतियों और भयावह डिजाइनों को लागू करने नहीं देगा।

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