जमशेदपुर, जागरण संवाददाता। अप्रैल 2000 से बंद पड़ी इंकैब इंडस्ट्रीज को पुनर्जीवित करने के लिए टाटा स्टील की 100 प्रतिशत अनुषंगी इकाई, टाटा स्टील लांग प्रोडक्ट (टीएसएलपी) ने एक बार फिर दिलचस्पी दिखाई है। वहीं, वेदांता ग्रुप और ए-वन इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड ने भी बोली लगाई है। इंकैब इंडस्ट्रीज को पुनर्जीवित करने का मामला नेशनल कंपनी लॉ अपीलिएट ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की कोलकाता बेंच में विचाराधीन है।

इस कंपनी को एनसीएलटी ने ही मई 2021 को दिवालिया घोषित कर दिया था लेकिन कर्मचारियों की ओर से मामला अपीलिएट ट्रिब्यूनल में जाने के बाद इस पर रोक लगा दी गई थी। वहीं अपीलिएट ट्रिब्यूनल ने पूर्व रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) शशि अग्रवाल को हटाकर उन्हें स्थान पर पंकज कुमार टिबरेवाल को प्रतिनियुक्त किया गया। जिनके द्वारा ही विज्ञापन जारी कर देश भर की निजी कंपनियों को 27 अगस्त तक इंकैब को टेकओवर करने के लिए आवेदन मांगे गए थे। इस बिडिंग प्रक्रिया में अपने बोली को वापस लेने के लिए कंपनियों के पास 23 सितंबर तक का समय है।

आरपी देंगे कंपनियों को इंफोरमेशन मेमोरेंडम

इंकैब इंडस्ट्रीज को पुनर्जीवित करने के लिए कौन-कौन सी कंपनियां इच्छुक है। इसके लिए आरपी की ओर से 24 सितंबर को कंपनियों के नाम की अंतिम सूची जारी करेगी। इसके बाद ही वे सभी कंपनियों को इंफोरमेशन मेमोरेंडम भी देंगे। जिसमें उन्हें बताया जाएगा कि इंकैब इंडस्ट्रीज की जमशेदपुर में 177 एकड़ जमीन के अलावा देश भर में परिसंपत्ति और कहां-कहां है। कंपनी पर बैंक, प्रमोटर सहित दूसरी कंपनियों सहित कर्मचारियों की कितनी राशि बकाया है। इंकैब इंडस्ट्रीज पर उनके सभी कर्मचारियों का 221 करोड़ रुपये बकाया है।

एक माह में कंपनियों को देना होगा रिजॉल्यूशन प्लान

इंकैब इंडस्ट्रीज को पुनर्जीवित करने के लिए चयनित कंपनियों को एक माह यानि 24 अक्टूबर तक अपना रिजॉल्यूशन प्लान देना होगा। जिसमें उन्हें बताना होगा कि कंपनी को पुनर्जीवित करने के लिए उनके पास किस तरह की योजना है और वे किस तरह से प्रमोटर व कर्मचारियों के बकाए राशि का भुगतान करेंगे। जिस कंपनी का सबसे ज्यादा राशि होगी, उसका ही चयन होता है।

टाटा स्टील को बायफर-आयफर मान चुकी थी बेस्ट बिडर

इंकैब इंडस्ट्रीज को पुनर्जीवित करने के लिए बायफर-आयफर भी टाटा स्टील को बेस्ट बिडर मान चुकी थी। बायफर की ओर से नौ दिसंबर 2009 को, आयफर द्वारा 30 नवंबर 2011 और दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा छह जनवरी 2016 को बेस्ट बिडर मान चुकी थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी पहली नवंबर 2016 को अपनी मुहर लगा दी थी। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा बायफर-आयफर को समाप्त कर एनसीएलटी का गठन कर दिया था। जिसके कारण कंपनी को पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया रुक गई थी।

इनकी भी सुनें

टाटा स्टील ने पहले ही इंकैब इंडस्ट्रीज को पुनर्जीवित करने का जो वादा किया था, उसे निभाया और आज भी अपनी बात पर कायम है। उसने हमारे साथ विश्वासघात नहीं किया है। हमारी शुभकामना है कि कंपनी का रिजॉल्यूशन प्लान सफल हो जाए।

-राम विनोद सिंह, महामंत्री, इंडियन केबल वर्कर्स यूनियन

 

Edited By: Rakesh Ranjan