जमशेदपुर, जासं। सभी धर्म अहिंसा और शांति का संदेश देता है। पूजा के माध्यम से भी हिंसा का प्रदर्शन नहीं किया जाना चाहिए। समाज में अब इस प्रकार की धारणा को समाप्त कर सामाजिक समरसता स्थापित करने की आवश्यकता है। ये बातें देशज संस्कृति रक्षा मंच के कपूर टुडू उर्फ कपूर बागी ने कहीं। शारदीय नवरात्रि की नवमी के दिन असुर राज हुदुड़ दुर्गा यानि महिषासुर का शहादत दिवस मनाते हुए उन्होंने कहा कि असुर जनजाति का गलत चरित्र चित्रण किया गया है।

 महानवमी के दिन चांडिल प्रखंड के चाकुलिया में देशज संस्कृति रक्षा मंच की ओर से शहादत दिवस का आयोजन किया गया। शहादत दिवस समारोह में उपस्थित लोगों ने हुदुड़ दुर्गा (महिषासुर) के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया। इस अवसर पर दो मिनट का मौन रखा गया। इस अवसर पर महिषासुर की जय और रावण के जयकारे के नारा लगाए गए। 

महिषासुर असुर जनजाति के महाराजा थे:कपूर टुडू

मौके पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कपूर टुडू ने कहा कि असुर जनजाति ने ही सबसे पहले लोहे की खोज की थी। महिषासुर असुर जनजाति के महाराजा थे। अब भी झारखंड के पलामू में असुर जनजाति के लोग रहते हैं। जब नवरात्र के दिनों में देश-विदेश में उत्सव मनाया जाता है, उसी दौरान असुर जनजाति के लोग नौ दिनों तक दुख और शोक में डूबे रहते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी जनजाति का अपमान नहीं किया जाना चाहिए। दुर्गा पूजा के दौरान महिषासुर का फोटो या मूर्ति को मरते हुए नहीं दिखाया जाना चाहिए। किसी भी महान पुरुष का अपमान नहीं किया जाना चाहिए। जिस प्रकार मां सरस्वती, मां लक्ष्मी, शिव शंकर, कृष्ण जन्माष्टमी मनाया जाता है, उसी प्रकार दुर्गा पूजा भी मनाया जाना चाहिए। इस प्रकार की प्रतिमा से हिंसा का प्रदर्शन होता है। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में हिंसा का प्रदर्शन ठीक नहीं है।

चांडिल के चाकुलिया प्रखंड में नहीं होती दुर्गा पूजा

चांडिल प्रखंड के चाकुलिया गांव में भी दुर्गा पूजा नहीं का आयोजन किया जाता बल्कि महिषासुर का शहादत दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर बृहस्पति सिंह सरदार ने पूजा-अर्चना के दौरान आदिवासी समाज का अपमान किए जाने पर दुख जताया। शहादत दिवस समारोह में चंदन सिंह, राजेश मुंडा, धनंजय सिंह, कुंजबिहारी किस्कू, चित्तरंजन मुर्मू, प्रशांत कुमार, बबलू हेम्ब्रम, मिथुन मुर्मू, तराश मुर्मू, दिलीप मार्डी, बुद्धेश्वर भूमिज समेत कई लोग शामिल हुए। कोरोना संक्रमण को लेकर शहादत दिवस समारोह के दौरान शारीरिक दूरी का अनुपालन किया गया।

हत्या का जश्न मनाना ठीक नहीं : समिति

चांडिल के चाकुलिया में महिषासुर को मौन श्रद्धांजलि देते लोग। जागरण 

जाहेरटोला, बारीडीह में सोमवार को शहीद स्मारक समिति के तत्वावधान में आदि लड़ाका अगुआ शहीद महिषासुर का शहादत दिवस मनाया गया। मौके पर उपस्थित लोगों ने महिषासुर की तस्वीर पर माल्यार्पण कर और दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया। इस अवसर पर बाबू नाग ने कहा कि मिथक कथाओं में महिषासुर की गलत व्याख्या की गई है। असुर आदिवासी समुदाय आज भी झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों में रहते हैं। उन्होंने कहा कि पूजा-अर्चना अलग बात है। मान्यता के अनुसार सभी अपना त्योहार मनाएं, लेकिन पूजा-अर्चना के दौरान हमारे पूर्वजों की हत्या का जश्न मनाना अब बंद होना चाहिए। शहादत समारोह में गीता सुंडी, गणेश राम, रवींद्र प्रसाद, सुनीता मुर्मू, अकाश मुखी, दिनकर कच्छप, कार्तिक मुखी, राजा कालिंदी समेत कई लोग उपस्थित थे।

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