जमशेदपुर, जासं।  यह कोई कचरे के गड्ढे की तस्वीर नहीं, बल्कि गांव की मुख्य सड़क का हाल है। इस रास्ते एक गांव नहीं बल्कि चार और उससे अधिक गांवों के लोग आवागमन करते हैं। यह तस्वीर है सरायकेला-खरसावां जिले के ईचागढ़ प्रखंड के सबसे शिक्षित और अंतिम छोर पर बसे देवलटांड गांव के मुख्य सड़क की। 

गांव के इस सड़क से होकर जिलिंगआदर, सरनाटांड, चिपड़ी के अलावा अन्य गांवों के भी लोग आवागमन करते हैं। पूरा विश्व कोरोना वायरस के संक्रमण से त्राहिमाम कर रहा है। सरकार और प्रशासन साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने और योजना बनाने में लगे हैं। ऐसे में गांव की मुख्य सड़क का इस प्रकार रहना पदाधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली और स्वच्छता के प्रति दृढ़ता की पोल खोल रहा है। देवलटांड में प्रतिवर्ष मलेरिया और डायरिया का प्रकोप रहता है। बवजूद इसके सरकारी कर्मचारियों के साथ ग्रामीण तनिक भी सचेत नहीं हैं। ग्रामीण चाहे तो सड़क पर एक बूंद भी जलजमाव नहीं होगा।

नाली की सफाई नहीं होने से सड़क की हालत हुई खराब

गांव की मुख्य सड़क पक्की सड़क है और सड़क के किनारे नाली भी है, लेकिन नाली की सफाई नहीं होने के कारण मुख्य सड़क पर कई जगह ऐसी स्थिति बनी हुई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि  क्या ग्रामीण स्तर पर कोई कर्मचारी नहीं है। क्या जल सहिया, सखी दीदी, आंगनबाड़ी सेविका, पंचायत सचिव, रोजगार सेवक, राशन डीलर या निर्वाचित जनप्रतिनिधि में वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और मुखिया गांव की मुख्य सड़क की इस दयनीय स्थिति से अवगत नहीं है। क्या विधायक, सांसद को अपनी जनता की कोई फिक्र नहीं है। क्या प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचल अधिकारी गांव की वास्तविक स्थिति से अनभिज्ञ हैं। ऐसी स्थिति में कैसे गांव को ओडीएफ घोषित कर इसे स्वच्छता का प्रतीक बता रहे हैं। वहीं गांव के स्वास्थ्य उपकेंद्र का दरवाजा माह में शायद ही किसी दिन खुलता हो। ऐसे में अगर मलेरिया, डायरिया या अन्य कोई बीमारी फैली तो ग्रामीणों का क्या होगा। 

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