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रेलवे का बड़ा अपग्रेडेशन: बदलेगा ट्रैक्शन सिस्टम; 160 KM की रफ्तार से टाटानगर-खड़गपुर रेलखंड पर दौड़ेंगी ट्रेनें

Published: Sun, 19 Jul 2026 07:00 AM (IST)

दक्षिण पूर्व रेलवे टाटानगर-खड़गपुर रेलखंड पर 1x25 केवी ट्रैक्शन प्रणाली को 2x25 केवी ऑटो ट्रांसफार्मर प्रणाली में अपग्रेड कर रहा है।

टाटानगर खड़गपुर रेलखंड की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

टाटानगर खड़गपुर रेलखंड की प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

HighLights

  1. 1x25 केवी से 2x25 केवी ट्रैक्शन प्रणाली में अपग्रेड।

  2. भारी मालगाड़ियों और हाई-स्पीड ट्रेनों का सुचारु परिचालन।

  3. वोल्टेज स्थिरता बढ़ेगी, परिचालन लागत और इंटरफेरेंस घटेगा।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। दक्षिण पूर्व रेलवे ने अपने सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण औद्योगिक कॉरिडोर Tatanagar-Kharagpur रेलखंड की क्षमता बढ़ाने के लिए एक बड़ी परियोजना की शुरुआत की है। 
 
रेलवे इस सेक्शन में मौजूदा 1x25 केवी विद्युत ट्रैक्शन प्रणाली को बदलकर अत्याधुनिक 2x25 केवी ऑटो ट्रांसफार्मर (AT) प्रणाली में अपग्रेड करने जा रहा है। दक्षिण पूर्व रेलवे ने इसके लिए 178.77 करोड़ रुपये की लागत से टेंडर जारी कर दिया है।
 

भारी मालगाड़ियों और हाई-स्पीड ट्रेनों का रास्ता होगा साफ

इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य इस रेलखंड पर 3,000 मीट्रिक टन से अधिक भार वाली भारी मालगाड़ियों का सुचारु और बाधारहित परिचालन सुनिश्चित करना है। 
 
यह नई प्रणाली विशेष रूप से टाटानगर रेलखंड के लिए गेम चेंजर साबित होगी, क्योंकि यहां से टाटा स्टील, खनन और विभिन्न इस्पात उद्योगों की भारी मालगाड़ियां रोजाना गुजरती हैं। 
 
इसके अलावा, यह अपग्रेडेशन भविष्य में 160 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक की रफ्तार से चलने वाली हाई-स्पीड यात्री ट्रेनों के संचालन के लिए भी आवश्यक उच्च विद्युत क्षमता प्रदान करेगा।
 

क्या हैं इस अत्याधुनिक तकनीक के तकनीकी फायदे?

  •     वोल्टेज में स्थिरता: नई प्रणाली में ओवरहेड लाइन (OHE) और नेगेटिव फीडर के बीच ट्रांसमिशन वोल्टेज 50 केवी तक पहुंच जाएगा, जबकि ट्रेनों को आवश्यकतानुसार 25 केवी बिजली ही मिलेगी। इससे वोल्टेज लॉस (विद्युत हानि) में भारी कमी आएगी।
  •     कम होगी परिचालन लागत: इस तकनीक के बाद दो ट्रैक्शन सब-स्टेशनों के बीच की दूरी मौजूदा 40-60 किमी से बढ़कर 80-90 किलोमीटर तक हो जाएगी, जिससे रेलवे की रखरखाव और परिचालन लागत घटेगी।
  •     कम होगा इंटरफेरेंस: यह सिस्टम इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस को भी काफी हद तक कम करेगा, जिससे ट्रेनों को अधिक स्थिर विद्युत आपूर्ति मिलेगी।


रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह अपग्रेडेशन दक्षिण पूर्व रेलवे के इस सबसे व्यस्त कॉरिडोर की विश्वसनीयता और दक्षता को कई गुना बढ़ा देगा।

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