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टाटानगर, हावड़ा और पटना रूट की प्रमुख ट्रेनों की बदली श्रेणी, जानिए नंबर बदलने का पूरा गणित और नए नंबर

Published: Tue, 03 Nov 2026 06:09 PM (IST)

दक्षिण पूर्व रेलवे ने टाटानगर, हावड़ा, पटना सहित प्रमुख रूटों पर चलने वाली आठ ट्रेनों का सुपरफास्ट दर्जा समाप्त कर दिया है। इससे यात्रियों को सुपरफास्ट सरचार्ज से मुक्ति मिलेगी।

रेलवे नियमों के अनुसार, किसी भी ट्रेन को सुपरफास्ट श्रेणी में बनाए रखने के लिए ठहराव सहित उसकी औसत गति 55 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक होना अनिवार्य है।

रेलवे नियमों के अनुसार, किसी भी ट्रेन को सुपरफास्ट श्रेणी में बनाए रखने के लिए ठहराव सहित उसकी औसत गति 55 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक होना अनिवार्य है। 

HighLights

  1. आठ प्रमुख ट्रेनों का सुपरफास्ट दर्जा समाप्त, किराया होगा सस्ता।

  2. यात्रियों को सुपरफास्ट सरचार्ज से मिलेगी बड़ी आर्थिक राहत।

  3. जनवरी 2027 से नए ट्रेन नंबर और कम किराया प्रभावी।

जासं, जमशेदपुर। दक्षिण पूर्व रेलवे ने यात्रियों को आर्थिक राहत देते हुए एक बड़ा निर्णय लिया है। रेलवे बोर्ड के निर्देश के तहत टाटानगर, रांची, पटना और हावड़ा रूट पर चलने वाली चार प्रमुख जोड़ी (कुल आठ) ट्रेनों का सुपरफास्ट दर्जा समाप्त कर दिया गया है। 
 
अब ये सभी गाड़ियांसाधारण एक्सप्रेस (नॉन-सुपरफास्ट) के रूप में संचालित होंगी। श्रेणी बदलने के साथ ही इन सभी ट्रेनों के नंबरों में भी संशोधन किया गया है, जो जनवरी 2027 से प्रभावी होगा। इस बदलाव से यात्रियों को सुपरफास्ट सरचार्ज से मुक्ति मिलेगी और टिकट का किराया सस्ता हो जाएगा।
 

क्यों बदला गया ट्रेनों का दर्जा और नंबर? 

रेलवे नियमों के अनुसार, किसी भी ट्रेन को सुपरफास्ट श्रेणी में बनाए रखने के लिए ठहराव सहित उसकी औसत गति 55 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक होना अनिवार्य है। 
 
समय के साथ नए स्टॉपेज जुड़ने, ट्रैक पर दबाव बढ़ने या परिचालन समय में वृद्धि के कारण जब औसत रफ्तार इस मानक से कम हो जाती है, तो उसका सुपरफास्ट टैग हटा दिया जाता है।
 
भारतीय रेलवे की पांच अंकों की नंबर प्रणाली में '12' और '22' से शुरू होने वाले नंबर सुपरफास्ट गाड़ियों के प्रतीक होते हैं।
 
सामान्य मेल या एक्सप्रेस बनने के बाद इन्हें जोनल कोड (जैसे दक्षिण पूर्व रेलवे के लिए 18xxx और पूर्व मध्य रेलवे के लिए 13xxx) के तहत नया नंबर दिया जाता है।
 

समझें ट्रेन नंबर का गणित 

आमतौर पर सुपरफास्ट ट्रेनों के आगे '12' या '22' होता है, लेकिन टाटानगर-कटिहार एक्सप्रेस का पुराना नंबर '28181' था। रेलवे प्रणाली में पहला अंक '2' तब जोड़ा जाता है जब '1' सीरीज पहले से उपयोग में हो या ट्रेन को किसी अन्य ट्रेन के साथ लिंक से अलग किया गया हो। 
 
टाटा-थावे एक्सप्रेस पहले से 18181 नंबर पर चल रही थी, इसलिए कटिहार ट्रेन को अलग पहचान देने के लिए शुरुआत में '2' जोड़ा गया था। अब इसे स्वतंत्र एक्सप्रेस नंबर '18187/18188' में बदल दिया गया है।
 

यात्रियों को सीधा वित्तीय लाभ: 

सुपरफास्ट का दर्जा हटने से स्लीपर और एसी श्रेणियों के टिकट पर लगने वाले अतिरिक्त सुपरफास्ट चार्ज (जो श्रेणी के अनुसार 15 रुपये से 75 रुपये तक होते हैं) की बचत होगी। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे आगामी यात्रा के लिए अग्रिम आरक्षण कराते समय नए ट्रेन नंबरों का मिलान जरूर कर लें।
 

बदली गई ट्रेनों की नई सूची और तिथियां 

  • टाटानगर-कटिहार एक्सप्रेस: पुराना नंबर 28181 ➔ नया नंबर 18187 (2 जनवरी 2027 से)
  • कटिहार-टाटानगर एक्सप्रेस: पुराना नंबर 28182 ➔ नया नंबर 18188 (1 जनवरी 2027 से)
  • हावड़ा-कंटाबांजी एक्सप्रेस: पुराना नंबर 22861/22862 ➔ नया नंबर 18073/18074 (1 जनवरी 2027 से)
  • हावड़ा-जूनागढ़ रोड एक्सप्रेस: पुराना नंबर 12871/12872 ➔ नया नंबर 18071 (2 जनवरी) और 18072 (3 जनवरी 2027 से)
  • पटना-रांची एक्सप्रेस: पुराना नंबर 12365/12366 ➔ नया नंबर 13265/13266 (1 जनवरी 2027 से)

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