टाटा ट्रस्ट में भारी कलह, विजय सिंह की भी हो चुकी विदाई; चंद्रशेखरन के बाद आगे क्या
टाटा समूह में टाटा ट्रस्ट के भीतर गहरा आंतरिक कलह चल रहा है, जिसके चलते सर रतन टाटा ट्रस्ट के ...और पढ़ें

ट्रस्ट के अंदरूनी शक्ति संघर्ष और चैरिटी कमिश्नर की रोक ने बढ़ाया टाटा समूह का संकट।
HighLights
विजय सिंह ने सर रतन टाटा ट्रस्ट उपाध्यक्ष पद छोड़ा।
चैरिटी कमिश्नर ने ट्रस्ट बोर्ड बैठकों पर लगाई रोक।
आंतरिक कलह से टाटा समूह का संकट गहराया।
जागरण संवादाता, जमशेदपुर। टाटा समूह में संकट केवल टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। टाटा संस की होल्डिंग कंपनी टाटा ट्रस्ट के भीतर भी भारी कलह मची है। अंदरूनी विवाद और नियामकीय दबाव के बीच सर रतन टाटा ट्रस्ट (एसआरटीटी) के उपाध्यक्ष विजय सिंह ने भी मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह का एसआरटीटी में कार्यकाल 14 अगस्त को समाप्त हो रहा था, लेकिन उन्होंने मंगलवार को ही पद छोड़ दिया और स्पष्ट कर दिया कि वे पुनर्नियुक्ति नहीं चाहते। हालांकि, वे जुलाई 2027 तक सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) और कुछ अन्य छोटे ट्रस्टों में बने रहेंगे।
विजय सिंह की इस विदाई को टाटा ट्रस्ट में चल रहे गहरे गवर्नेंस संकट का सीधा परिणाम माना जा रहा है। इससे पहले 2025 में विजय सिंह को टाटा संस बोर्ड से भी हटा दिया गया था।
ट्रस्ट के भीतर नियुक्तियों, जानकारी साझा करने और 1923 के ट्रस्ट डीड नियमों (पारसी जोरोस्ट्रियन और मुंबई निवासी होने की शर्त) को लेकर भी गहरा मतभेद चल रहा है। इसी विवाद के कारण मेहली मिस्त्री जैसे अहम ट्रस्टी बाहर हो गए, जबकि वेनु श्रीनिवासन ने भी खुद को कुछ ट्रस्टों से अलग कर लिया है।
अब एसआरटीटी का कामकाज केवल नोएल टाटा, जिमी टाटा, जेहांगीर एच.सी. जेहांगीर, वेनु श्रीनिवासन और डेरियस खंबटा जैसे सीमित ट्रस्टियों के भरोसे चल रहा है। संकट को महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के एक आदेश ने और बढ़ा दिया है।
बोर्ड संरचना और पुराने शेयर ट्रांसफर की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए कमिश्नर ने मई 2026 में एसआरटीटी की बोर्ड बैठकों पर रोक लगा दी थी। इसके चलते करीब 400 करोड़ रुपये के परमार्थ (चैरिटेबल) कार्य और फंड आवंटन प्रभावित हो रहे हैं।
18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की अहम एजीएम से ठीक पहले ट्रस्ट में यह उथल-पुथल समूह के भविष्य के लिए बड़े खतरे का संकेत दे रही है। नोएल टाटा ने नए कार्यकाल के लिए पूंजी अनुशासन और रणनीतिक बदलाव जैसी कई कड़ी शर्तें रखी थीं, जिन्हें चंद्रशेखरन ने मानने से इनकार कर दिया।
इसके बाद छह महीने तक लगातार बातचीत और बैठकों के बावजूद दोनों पक्षों में कोई सहमति नहीं बन सकी। आखिरकार, भविष्य की रणनीतिक परियोजनाओं के महत्वपूर्ण चरण में होने और नेतृत्व की अनिश्चितता को खत्म करने के लिए चंद्रशेखरन ने खुद ही पद छोड़ने का फैसला कर लिया। उन्होंने बोर्ड से जल्द नया उत्तराधिकारी खोजने की अपील की है।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।