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'सिंगापुर की तरह औद्योगिक सुरक्षा पर गंभीर हों कंपनियां', जमशेदपुर में CII सेफ्टी टॉक में बोले टाटा स्टील के VP

By Nirmal PrasadEdited By: Piyush Pandey
Published: Mon, 26 Oct 2026 03:27 PM (IST)

टाटा स्टील के राजीव मंगल ने जमशेदपुर में सीआईआई के सेफ्टी टॉक में औद्योगिक सुरक्षा पर जोर दिया।

सीआईआई के सेफ्टी टॉक सम्मेलन में लगाए गए प्रदर्शनी का उद्घाटन करते टाटा स्टील के वीपी राजीव मंगल। (जागरण)

सीआईआई के सेफ्टी टॉक सम्मेलन में लगाए गए प्रदर्शनी का उद्घाटन करते टाटा स्टील के वीपी राजीव मंगल। (जागरण)

HighLights

  1. सिंगापुर में जानलेवा औद्योगिक दुर्घटना पर मालिक को जेल होती है।

  2. भारत में औद्योगिक सुरक्षा के प्रति कंपनियों को गंभीर होना होगा।

  3. एसओपी पालन न करना और रिपोर्टिंग की कमी बड़ी समस्या।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। सिंगापुर में यदि कोई जानलेवा औद्योगिक दुर्घटना होती है तो कंपनी मालिक, ठेकेदार और मैनेजर तक को जेल भेज दिया जाता है।

भारत में भले ही अभी इस तरह की सख्ती नहीं है, लेकिन कंपनियों को सुरक्षा के प्रति गंभीर और संवेदनशील होना होगा। यह बात टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (सेफ्टी, हेल्थ एंड सस्टेनेबिलिटी) राजीव मंगल ने सोमवार को कही।

कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) के झारखंड चैप्टर की ओर से आदित्यपुर स्थित होटल क्रूज में आयोजित दो दिवसीय सेफ्टी टॉक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि औद्योगिक सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है, जिसमें सभी कंपनियों को मिलकर काम करना होगा।

बड़ी कंपनियां नई और आधुनिक तकनीक अपना रही हैं, लेकिन उन्हें एमएसएमई और छोटी कंपनियों को भी सुरक्षा के मामले में साथ लेकर चलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि छोटी कंपनियों के पास सीमित संसाधन और कम निवेश क्षमता होने के कारण वे सुरक्षा प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरणों पर पर्याप्त खर्च नहीं कर पाती हैं।

ऐसे में बड़ी कंपनियों को उन्हें सहयोग देना चाहिए। एक भी जानलेवा दुर्घटना उत्पादन और उत्पादकता से जुड़े तमाम प्रयासों पर सवाल खड़ा कर देती है।

टाटा स्टील में जानलेवा दुर्घटनाओं का औसत अब भी चिंता का विषय

राजीव मंगल ने टाटा स्टील का उदाहरण देते हुए कहा कि कंपनी के विभिन्न लोकेशन पर लॉस्ट टाइम इंजरी फ्रीक्वेंसी रेट (एलटीआईएफआर) में पहले की तुलना में कमी आई है।

असुरक्षित कार्यस्थलों को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं। इसके बावजूद जानलेवा दुर्घटनाओं का औसत अपेक्षित रूप से कम नहीं हुआ है, जो चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि कुछ डिवीजन में दुर्घटनाओं की रिपोर्टिंग नहीं होना भी गंभीर समस्या है। वहीं, कुछ ऐसे डिवीजन भी हैं, जहां पिछले 15 वर्षों से कोई जानलेवा दुर्घटना या लॉस्ट टाइम इंजरी (एलटीआई) दर्ज नहीं हुई है। इसके बावजूद सुरक्षा के प्रति लापरवाही नहीं बरती जा सकती, क्योंकि सेफ्टी एक सतत प्रक्रिया है।

एसओपी का पालन नहीं करना दुर्घटनाओं की बड़ी वजह

राजीव मंगल ने कहा कि भारत मे एक मानवीय प्रवति है कि मुझे कुछ नहीं होगा जो दुर्घटना का कारण बनते है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक दुर्घटना के बाद उसकी समीक्षा होनी चाहिए।

यह पता लगाना जरूरी है कि हादसा किन कारणों से हुआ, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। कई बार दुर्घटनाओं की वजह स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का पालन नहीं करना होता है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी गंभीर हादसों को न्योता देती है।

ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां कर्मचारी सुरक्षा को लेकर काफी जागरूक हैं। जोखिम वाले क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की अनदेखी होने पर वे काम करने से इनकार कर देते हैं।

वहां खनन समेत विभिन्न उद्योगों में भारी वाहनों पर सेंसर लगाए जाते हैं, जो दुर्घटना की आशंका होने पर समय रहते वाहन को रोकने में मदद करते हैं।

असुरक्षित क्षेत्र में काम करने से इनकार करें कर्मचारी

राजीव मंगल ने सभी कंपनियों के कर्मचारियों से अपील की कि वे जानलेवा दुर्घटनाओं को रोकने के लिए असुरक्षित परिस्थितियों में काम करने से इनकार करें।

सुरक्षा व्यवस्था में जहां भी कमी नजर आए, उसके खिलाफ आवाज उठाएं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी और सतर्कता से ही औद्योगिक दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

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