टाटा वर्कर्स यूनियन में सरगर्मी: MGB लाभ की मांग को लेकर अध्यक्ष से मिले कर्मचारी, जल्द कमेटी मीटिंग बुलाने की उठी मांग
टाटा स्टील के एनएस-4 ग्रेड के नए कर्मचारियों ने मिनिमम गारेंटेड बेनीफिट (एमजीबी) की मांग को लेकर टाटा वर्कर्स यूनियन ...और पढ़ें

टाटा स्टील एनएस-4 कर्मचारियों ने एमजीबी लाभ के लिए अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन।
HighLights
एनएस-4 ग्रेड के नए कर्मचारियों ने एमजीबी की मांग की।
टाटा वर्कर्स यूनियन अध्यक्ष को सौंपा गया ज्ञापन।
अध्यक्ष ने विसंगति कमेटी में चर्चा का आश्वासन दिया।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा स्टील में वेतन समझौते और प्रशासनिक बैठकों को लेकर टाटा वर्कर्स यूनियन कार्यालय में हलचल तेज़ हो गई है। सोमवार को जहां एक तरफ एनएस-4 ग्रेड में नए स्थायी हुए कर्मचारियों ने मिनिमम गारेंटेड बेनीफिट (MGB) के लाभ की मांग को लेकर अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपा, वहीं दूसरी तरफ यूनियन में जल्द से जल्द कमेटी मीटिंग बुलाने की आवाज़ भी बुलंद होने लगी है।
प्रतिनिधिमंडल ने यूनियन अध्यक्ष को बताया कि टाटा स्टील में वर्ष 2022-23 में लगभग 150 ट्रेड अप्रेंटिस प्रशिक्षुओं कंपनी ज्वाइंन की। दो वर्ष के प्रशिक्षण के बाद दिसंबर 2025 में आल इंडिया आल इंडिया काउंसिल आफ टेक्निकल एजुकेशन (एआइसीटीई) की परीक्षा हुई और 27 दिसंबर को रिजल्ट आया।
NS-4 ग्रेड कर्मचारियों की MGB की मांग, अध्यक्ष ने दिया आश्वासन
टाटा स्टील के एनएस-4 (ब्लॉक-2) ग्रेड में कार्यरत कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी से उनके कार्यालय में मुलाकात की।
क्या है कर्मचारियों का पक्ष?
- 2022-23 बैच के प्रशिक्षु: लगभग 150 ट्रेड अप्रेंटिस प्रशिक्षुओं ने वर्ष 2022-23 में कंपनी जॉइन की थी।
- दिसंबर 2025 में परीक्षा व रिजल्ट: AICTE की परीक्षा के बाद 27 दिसंबर 2025 को परिणाम आया और 14 जनवरी 2026 को इन्हें स्थायी तौर पर जॉइन कराया गया।
- वेतन समझौते में विषमता: कर्मचारियों का कहना है कि पिछले वेतन समझौतों में सभी प्रशिक्षुओं को MGB का लाभ मिला था, लेकिन नए समझौते में उन्हें इससे वंचित रखा जा रहा है।
यूनियन अध्यक्ष का आश्वासन
अध्यक्ष संजीव चौधरी ने कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि जल्द ही विसंगति कमेटी की बैठक होगी, जिसमें प्रबंधन के समक्ष इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा। गौरतलब है कि इससे पहले रजिस्टर्ड रिलेशन के प्रशिक्षु भी इसी तरह की मांग उठा चुके हैं।
यूनियन संविधान के तहत जल्द 'कमीटी मीटिंग' कराने की उठी मांग
अध्यक्ष संजीव चौधरी के सोमवार से पुनः कार्यालय लौटने के साथ ही यूनियन के अंदरूनी राजनीतिक गलियारों में कमेटी मीटिंग की मांग तेज़ हो गई है। यूनियन के आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में एक पदाधिकारी ने यह मुद्दा उठाया है।
- संविधान का नियम: टाटा वर्कर्स यूनियन के संविधान के अनुसार प्रत्येक दो महीने में कमेटी मीटिंग बुलाना अनिवार्य है।
- क्यों टली थी बैठक? बीते 6 जुलाई को फाइनेंस कमेटी की बैठक में फरवरी से मई तक के चार महीनों के आय-व्यय की समीक्षा हुई थी। इसके बाद प्रस्तावित कमेटी मीटिंग को अध्यक्ष की पत्नी के असामयिक निधन के कारण स्थगित कर दिया गया था।
अब अध्यक्ष के वापस लौटने के बाद पदाधिकारियों और कर्मचारियों की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि यूनियन नेतृत्व कब कमेटी मीटिंग की तारीख का ऐलान करता है।
