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झारखंड में टाटा स्टील का बड़ा निवेश: 10 हजार करोड़ से बढ़ेगा रोजगार और उत्पादन, ग्रीन स्टील पर जोर

Published: Tue, 21 Jul 2026 08:24 AM (IST)Updated: Tue, 21 Jul 2026 11:17 AM (IST)

Tata Steel 2028 तक झारखंड में 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश करेगी, जिससे लगभग दो हजार युवाओं को प्रत्यक्ष ...और पढ़ें

दो हजार युवाओं को मिलेगा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार का अवसर।

दो हजार युवाओं को मिलेगा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार का अवसर।

HighLights

  1. टाटा स्टील 2028 तक झारखंड में 10 हजार करोड़ निवेश करेगी।

  2. दो हजार युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे।

  3. ग्रीन स्टील तकनीक और उत्पादन क्षमता का विस्तार होगा।

राज्य ब्यूरो, रांची। टाटा स्टील वर्ष 2028 तक झारखंड में खासकर जमशेदपुर में 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इससे लगभग दो हजार युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलगा। इस निवेश का मुख्य उद्देश्य स्टील उत्पादन क्षमता का विस्तार करना और ग्रीन स्टील (पर्यावरण अनुकूल) तकनीक को अपनाना है।

टाटा स्टील द्वारा कम कार्बन उत्सर्जन और ऊर्जा की बचत के लिए सात हजार करोड़ रुपये के निवेश से 'ईजीमेल्ट' और 'हिसरना' जैसी आधुनिक तकनीकें स्थापित की जाएंगी।

वहीं, 2600 करोड़ की लागत से टिनप्लेट डिवीजन का विस्तार किया जाएगा। 15 सौ करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक कांबी मिल परियोजना का निर्माण किया जाएगा। बताया जाता है कि इस निवेश के माध्यम से टाटा समूह झारखंड के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को
मजबूत करने के साथ-साथ टिकाऊ और आधुनिक विनिर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएगा। 

इन तीनों परियोजनाओं में से प्रत्येक से छह सौ से सात सौ तक नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। कंपनी का लक्ष्य क्षमता विस्तार और कम कार्बन उत्सर्जन वाले इस्पात विनिर्माण के तरीकों को अपनाकर भारत में स्टील बनाने की क्षमता को मौजूदा के 2.73 करोड़ टन सालाना से बढ़ाकर चार करोड़ टन करना है।

नाबार्ड के स्थापना दिवस पर जीआई उत्पादों को पहचान दिलाने पर जोर

राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) का 45वां स्थापना दिवस मनाया गया। इस वर्ष के समारोह की थीम जीआई टैग (स्थानीय विरासत को वैश्विक पहचान) था, जिसका उद्देश्य झारखंड के पारंपरिक उत्पादों, स्थानीय शिल्प, सांस्कृतिक विरासत तथा ग्रामीण आजीविका को प्रोत्साहन देना था।

भारतीय रिजर्व बैंक की क्षेत्रीय निदेशक रक्षा मिश्रा ने ग्रामीण वित्त, वित्तीय समावेशन तथा ग्रामीण ऋण प्रणाली को सुदृढ़ बनाने में नाबार्ड के योगदान की सराहना की। उन्होंने रिजर्व बैंक और नाबार्ड के बीच दशकों से चले आ रहे संस्थागत संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों संस्थान मिलकर समावेशी एवं सुदृढ़ ग्रामीण वित्तीय व्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

झारक्राफ्ट की एमडी गरिमा सिंह ने कहा कि ग्रामीण विकास, आजीविका संवर्धन तथा स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिलाने में नाबार्ड के योगदान का जिक्र किया। कहा कि जीआइ टैग केवल बौद्धिक संपदा का अधिकार नहीं है, बल्कि यह किसी क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक ज्ञान और शिल्प कौशल का प्रतीक है।

उन्होंने झारखंड के जीआइ उत्पादों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने के लिए सभी हितधारकों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण झारखंड के सभी 12 जीआइ उत्पादों की प्रदर्शनी रही, जिसमें राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक एवं शिल्प परंपरा का प्रदर्शन किया गया।