एनसीएलटी की हरी झंडी के बाद टाटा स्टील में RIL का मर्जर प्रभावी, जानिए कंपनी को क्या होगा फायदा
टाटा स्टील लिमिटेड ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी इकाई रुजुवालिका इंवेस्टमेंट लिमिटेड (RIL) का खुद में विलय पूरा कर लिया है।

कंपनी ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के नियमों के तहत शेयर बाजारों को दी गई आधिकारिक सूचना में इसकी पुष्टि की है।
HighLights
विलय से टाटा स्टील की अधिकृत पूंजी में वृद्धि हुई।
कॉर्पोरेट संरचना सुव्यवस्थित, परिचालन दक्षता में सुधार होगा।
जासं, जमशेदपुर। टाटा समूह की दिग्गज इस्पात निर्माता कंपनी टाटा स्टील लिमिटेड ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी इकाई रुजुवालिका इंवेस्टमेंट लिमिटेड (RIL) के खुद में विलय की प्रक्रिया पूरी कर ली है।
मंगलवार से यह मर्जर योजना विधिवत रूप से प्रभावी हो गई है। कंपनी ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियमों के तहत शेयर बाजारों (BSE और NSE) को दी गई आधिकारिक सूचना में इसकी पुष्टि की है।
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) की मुंबई पीठ ने एक अक्टूबर 2026 को इस समामेलन योजना को स्वीकृति दी थी।
इसके बाद, कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 232 के तहत आरआईएल ने 28 अक्टूबर को मुंबई स्थित कंपनी रजिस्ट्रार (RoC) के पास आदेश की प्रमाणित प्रति दर्ज कराई।
टाटा स्टील द्वारा अंतिम दस्तावेज दाखिल किए जाने के साथ ही यह योजना पूरी तरह से लागू हो गई। इस विलय के प्रभावी होने के साथ ही रुजुवालिका इन्वेस्टमेंट्स की 1.55 करोड़ रुपये की अधिकृत इक्विटी पूंजी टाटा स्टील की पूंजी में समाहित हो गई है।
इसके परिणामस्वरूप, टाटा स्टील की कुल अधिकृत शेयर पूंजी बढ़कर 32,621.05 करोड़ रुपये हो गई है। चूंकि आरआईएल पूरी तरह से टाटा स्टील के स्वामित्व वाली इकाई थी।
इसलिए इस प्रक्रिया में किसी भी नए शेयर का आवंटन नहीं किया गया है और अनुषंगी कंपनी के सभी पुराने शेयरों को निरस्त कर दिया गया है।
रुजुवालिका इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड (RIL) टाटा स्टील की पूर्ण स्वामित्व वाली एक वित्तीय और निवेश अनुषंगी कंपनी थी, जिसकी स्थापना 1 दिसंबर 1988 को हुई थी। इसका पंजीकृत कार्यालय मुंबई के फोर्ट क्षेत्र में स्थित था।
यह कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) के रूप में पंजीकृत थी और मुख्य रूप से वित्तीय परिसंपत्तियों के प्रबंधन तथा प्रतिभूतियों (शेयरों) के लेन-देन से जुड़ी थी।
हालांकि, पिछले कुछ समय से इसमें कोई सक्रिय व्यावसायिक परिचालन नहीं हो रहा था। कॉरपोरेट ढांचे को सुव्यवस्थित करने, प्रशासनिक खर्चों में कटौती करने और परिचालन दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से टाटा स्टील ने इसका खुद में पूर्ण विलय करने का निर्णय लिया।