जमशेदपुर, निर्मल प्रसाद।  टाटा स्टील कंपनी स्टील के कचरे से निकले ठोस अपशिष्ट पदार्थ एलडी स्लैग से सल्फेट फर्टिलाइजर का निर्माण किया है, जो मिट्टी की उर्वरा को बेहतर करेगा। टाटा स्टील सल्फेट फर्टिलाइजर का सफल परीक्षण कर चुकी है। टाटा स्टील जमशेदपुर सहित कलिंगानगर प्लांट से वर्तमान में 14 मिलियन टन स्टील का उत्पादन करती है।

स्टील निर्माण के लिए आयरन ओर कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होता है। स्टील मेल्टिंग के बाद इसका 20 प्रतिशत कचरा, ठोस अपशिष्ट (एलडी स्लैग) के रूप में बाहर निकलता है। कंपनी सड़क व सीमेंट निर्माण सहित कैमिकल पेंट बनाने में इसका इस्तेमाल करती है। लेकिन अब कंपनी नए शोध कर एलडी स्लैग से सल्फेट फर्टिलाइजर बनाने में सफल रही है। जो बंजर जमीन की उर्वरा शक्ति को फिर से बढ़ा देगी। कंपनी प्रबंधन का दावा है कि झारखंड, ओडिशा व असम जैसे राज्य जहां अम्लीय मिट्टी ज्यादा पाई जाती है, वहां सल्फेट फर्टिलाइजर वरदान साबित होगा। जिससे फसल की उत्पादकता बढ़ेगी।

मिल चुका है ग्रीनको अवार्ड

टाटा स्टील को इसके लिए कंफडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआइआइ) से मोस्ट इनोवेटिव प्रोजेक्ट के रूप में ग्रीनको अवार्ड भी मिल चुका है। लैब टेस्ट में सफल रहा परीक्षण टाटा स्टील ने सल्फेट फर्टिलाइजर का पश्चिम बंगाल के विधानचंद्र विश्वविद्यालय, यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर साइंस बेंगलुरू और इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च साइस नई दिल्ली में भी सफल परीक्षण हो चुका है। इसके लिए लैब टेस्ट से फील्ड टेस्ट में एलडी स्लैग से बने सल्फेट फर्टिलाइजर के रिजल्ट के बेहतर नतीजे आए।

ये कहते कंपनी प्रवक्ता

एलडी स्लैग से सल्फेट फर्टिलाइजर का निर्माण इस बात का उदाहरण है कि टाटा स्टील ठोस अपशिष्ट को कम करने और इसका उपयोग आर्थिक मूल्यों के उत्पादों में करने के लिए इनोवेशन को बढ़ावा दे रही है। एलडी स्लैग से बने जैविक उर्वरक सल्फेट फर्टिलाइजर अम्लीय मिट्टी की उर्वरकता को बढ़ाने में वरदान साबित होगा।

-प्रवक्ता, टाटा स्टील