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टाटा स्टील और भारतीय रेल की नई पार्टनरशिप: फिक्स रहेंगे मालभाड़े के दाम, टाटानगर को मिलेगी रैक की नो-वेटिंग गारंटी

Published: Thu, 05 Nov 2026 07:20 PM (IST)

टाटा स्टील ने भारतीय रेल के साथ दीर्घकालिक टैरिफ अनुबंध (LTTC) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे वह इस्पात क्षेत्र में ऐसा समझौता करने वाली पहली कंपनी बन गई है।

जमशेदपुर प्लांट के लिए नोवामुंडी और जोड़ा की खदानों से रोजाना लाखों टन लौह अयस्क व कोयला मंगाना पड़ता है।

जमशेदपुर प्लांट के लिए नोवामुंडी और जोड़ा की खदानों से रोजाना लाखों टन लौह अयस्क व कोयला मंगाना पड़ता है।

HighLights

  1. टाटा स्टील ने भारतीय रेल से दीर्घकालिक टैरिफ अनुबंध किया।

  2. स्थिर मालभाड़ा, रैक की निर्बाध आपूर्ति से कंपनी को लाभ।

  3. जमशेदपुर प्लांट और टाटानगर स्टेशन को मिलेगी प्राथमिकता।

जासं, जमशेदपुर। टाटा स्टील ने भारतीय रेल के साथ बहुप्रतीक्षित दीर्घकालिक टैरिफ अनुबंध (एलटीटीसी) पर हस्ताक्षर कर इतिहास रच दिया है।

इस्पात क्षेत्र में रेलवे के साथ ऐसा विशेष और बहुवर्षीय वाणिज्यिक समझौता करने वाली टाटा स्टील देश की पहली कंपनी बन गई है।

तीन से पांच साल की अवधि के लिए हुए इस समझौते के तहत टाटा स्टील रेलवे को निश्चित माल ढुलाई और राजस्व की गारंटी देगी।

इसके बदले रेलवे कंपनी को स्थिर मालभाड़ा, विशेष रियायत और मालगाड़ियों (रैक) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।

क्या है एलटीटीसी और कैसे मिलेगा दोहरा लाभ?

आसान शब्दों में समझें तो लॉन्ग टर्म टैरिफ कांट्रैक्ट (एलटीटीसी) रेलवे और बड़े औद्योगिक घरानों के बीच माल ढुलाई का एक सुरक्षित थोक समझौता है।

इस अनुबंध का सबसे बड़ा लाभ यह है कि वित्त वर्ष के बीच में यदि रेलवे मालभाड़े की दरों में कोई बढ़ोतरी करता है, तो उसका असर टाटा स्टील पर नहीं पड़ेगा।

कंपनी को पूरे अनुबंध काल के दौरान अप्रत्याशित भाड़ा वृद्धि से सुरक्षा (एस्केलेशन प्रोटेक्शन) मिलेगी। इसके अलावा, तय सीमा से अधिक माल ढुलाई करने पर रेलवे कंपनी को विशेष मालभाड़ा छूट (फ्रेट कंसेशन) भी देगा।

इससे रेलवे को नियमित बड़ा राजस्व मिलेगा और कंपनी की परिवहन लागत में भारी बचत होगी।

जमशेदपुर प्लांट और टाटानगर को होगा सीधा फायदा

इस समझौते का सबसे बड़ा जमीनी असर जमशेदपुर स्थित टाटा स्टील के मुख्य प्लांट और टाटानगर रेलवे स्टेशन पर दिखाई देगा।

जमशेदपुर प्लांट के लिए नोवामुंडी और जोड़ा की खदानों से रोजाना लाखों टन लौह अयस्क व कोयला मंगाना पड़ता है, वहीं यहां से तैयार स्टील को देश के कोने-कोने और बंदरगाहों तक भेजा जाता है।

अब तक कई बार रैक की कमी से आपूर्ति श्रृंखला बाधित होती थी। समझौते के बाद दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल द्वारा टाटानगर स्टेशन और कंपनी की साइडिंग को रैक व वैगन आपूर्ति में पहली प्राथमिकता (प्रिफरेंशियल ट्रीटमेंट) दी जाएगी।

इससे स्थानीय स्तर पर माल लदान तेज होगा, लाजिस्टिक्स लागत घटेगी और स्टील की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।

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