जमशेदपुर में बंद हो सकता है P&M Mall, 2.23 करोड़ नहीं दिए तो जमीन वापस लेगी टाटा स्टील
टाटा स्टील ने बिष्टुपुर स्थित पीएंडएम एंड हाइटेक इंफ्रास्ट्रक्चर से वित्तीय वर्ष 2008-09 से 2014-15 तक के बकाया लीज रेंट ...और पढ़ें

पीएंडएम मॉल। (जागरण)
HighLights
टाटा स्टील ने पीएंडएम हाइटेक से बकाया लीज रेंट मांगा।
2.23 करोड़ रुपये का भुगतान 15 दिनों में करने का निर्देश।
भुगतान न होने पर सबलीज रद्द कर जमीन वापस लेगी कंपनी।
प्रदीप सिंह, जमशेदपुर। टाटा स्टील ने बिष्टुपुर स्थित पीएंडएम एंड हाइटेक इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड पर बकाया लीज रेंट और सेस की वसूली के लिए कड़ा रुख अपनाया है।
कंपनी ने पीएंडएम एंड हाइटेक इंफ्रास्ट्रक्चर के चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव आफिसर नितेश कुमार को पत्र भेजकर दो करोड़ 23 लाख 86 हजार रुपये की बकाया राशि 15 दिनों के भीतर जमा करने का निर्देश दिया है।
कंपनी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर सबलीज की स्वीकृति रद करने और संबंधित जमीन को वापस अपने कब्जे में लेने की कार्रवाई की जा सकती है।
टाटा स्टील के चीफ (लैंड मैनेजमेंट) आनंद कुमार द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि यह बकाया वित्तीय वर्ष 2008-09 से 2014-15 की अवधि का है। इसमें लीज रेंट के साथ लागू 25 प्रतिशत रोड सेस शामिल है।
कंपनी ने कहा है कि कई बार पत्र भेजे जाने और पीएंडएम एंड हाइटेक की ओर से अपना पक्ष रखे जाने के बावजूद अब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया है।
टाटा स्टील ने अपने पत्र में झारखंड सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के आठ जून 2007 के पत्र का हवाला दिया है।
कंपनी के अनुसार, पीएंडएम एंड हाइटेक इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रस्तावित सबलीज की स्वीकृति सालाना किराया और सेस के भुगतान की शर्त पर दी गई थी। सरकारी स्वीकृति में यह भी प्रविधान था कि बकाया राशि की वसूली पब्लिक डिमांड रिकवरी एक्ट के तहत की जा सकती है।
कंपनी ने सात मार्च 2008 को टाटा स्टील और पीएंडएम एंड हाइटेक इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच हुए एग्रीमेंट फार लीज की शर्तों का भी उल्लेख किया है। पत्र के अनुसार, समझौते में सबलीज धारी को निर्धारित दर पर किराया और सेस का भुगतान साल में दो बार छह जनवरी और छह जुलाई तक करना था। भुगतान में देरी होने पर निर्धारित दर से ब्याज देने की भी शर्त थी।
छह माह तक बकाया रहा तो जमीन वापस
टाटा स्टील ने समझौते की धारा 6.1.3 का हवाला देते हुए कहा है कि यदि किराया, सेस या अन्य देय राशि छह महीने तक बकाया रहती है और मामला समझौते के प्रविधान के तहत वास्तविक मध्यस्थता प्रक्रिया में नहीं है तो कंपनी को जमीन पर दोबारा कब्जा लेने और सबलीज समाप्त करने का अधिकार है।
पत्र में कहा गया है कि सबलीज रेंट के भुगतान को लेकर पूर्व में भेजे गए पत्रों में किए गए आग्रहों को झारखंड हाई कोर्ट के 22 जुलाई 2025 के आदेश तथा लीज समझौते में निर्धारित दायित्वों के आधार पर स्वीकार नहीं किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले का भी उल्लेख
टाटा स्टील ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल अन्य लागू सेस की मांग नहीं की गई है। कंपनी के अनुसार, लीज रेंट के 120 प्रतिशत तक के अन्य सेस का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए मौजूदा मांग में उसे शामिल नहीं किया गया है।
कंपनी ने अपने ताजा पत्र में कहा है कि वर्ष 2008 से 2015 के बकाये का भुगतान 15 दिनों के भीतर किया जाए। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर कंपनी ने सबलीज की स्वीकृति रद करने तथा संबंधित जमीन को पूरी तरह अपने कब्जे में लेने की कार्रवाई की चेतावनी दी है। कंपनी ने यह कार्रवाई पीएंडएम एंड हाइटेक के जोखिम और खर्च पर करने की बात कही है।
महत्वपूर्ण तथ्य
- बकाया राशि: 2,23,86,000 रुपये
- बकाया अवधि: वित्तीय वर्ष 2008-09 से 2014-15
- मांग: लीज रेंट और 25% रोड सेस
- भुगतान की समय सीमा: पत्र मिलने के 15 दिन
- भुगतान नहीं होने पर: सबलीज रद करने और जमीन वापस लेने की चेतावनी
- अन्य सेस: 120% तक की मांग फिलहाल नहीं, मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित
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