जमशेदपुर, जासं।  31 अक्टूबर से लगातार चार दिनों तक बंद रहने के बाद टाटा मोटर्स सोमवार को खुल गई। कंपनी के खुलने के बाद कॉलोनी से लेकर वहां के चौक-चौराहे, शॉप-फ्लॉर व कंपनी के गेटों पर रौनक लौट आई। कंपनी के विभिन्न डिवीजनों में काम हुआ। इसके बावजूद सबके मुख पर फिर से ब्लॉक-क्लोजर होने की चर्चा रही। 

कर्मचारियों का कहना था कि चालू माह में 2500 वाहन बनाने हैं, जो 12 से 15 दिन के अंदर बना लिए जाएंगे। बीते माह अक्टूबर में भी इतने की वाहन बनाए गए हैं। वैश्विक मंदी का असर ऑटोमोबाइल कंपनियों में दिख रही है। फिर से क्लोजर की चिंता स्थायी, अस्थायी व ठेका मजदूरों के चेहरे पर झलक रही है। पहले से ही मंदी की वजह से कर्मचारियों की हालत खराब हो गई है। टाटा मोटर्स पर निर्भर रहने वाली कंपनियों के कर्मचारी सड़क पर आ गए हैं। 

अबतक 38 बार ब्‍लॅाक क्‍लोजर

कंपनी में 31 अक्टूबर से दो नवंबर तक यानी तीन दिनों तक कंपनी लगातार बंद रही। तीन नवंबर को रविवार था फिर चार नवंबर सोमवार को कंपनी खुली है। चालू वित्तीय वर्ष में कंपनी में कुल 38 क्लोजर हो चुका है। पूर्व में हुए समझौते के मुताबिक एक साल में 39 क्लोजर ही लिया जा सकता है। इसे बढ़ाने के लिए प्रबंधन-यूनियन के बीच समझौते करने होंगे।

पहली बार छह को विदाई देगी यूनियन

टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन पहली बार छह नवंबर को अपने साथियों को विदाई देगी। यूनियन ने निर्णय लिया है कि हरेक माह अवकाश ग्रहण करने वाले यूनियन सदस्यों (कर्मचारियों) को विदाई दी जाएगी। इसी क्रम में छह नवंबर को यूनियन कार्यालय में एक सामूहिक विदाई समारोह का आयोजन किया गया है। इधर, सोमवार को यूनियन पदाधिकारियों की रूटीन बैठक हुई जिसमें विदाई समारोह आयोजित करने पर सहमति बनी। इसके साथ ही अस्थायी कर्मियों को काम से बैठाए जाने की निंदा हुई। 

Posted By: Rakesh Ranjan

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