जमशेदपुर, जासं। माइकल जॉन लेक्चर गोल्ड अवार्ड से गुरुवार को सम्मानित होने के मौके पर टाटा समूह बोर्ड के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन ने अपने कर्मचारियों को सफलता के पांच मंत्र दिए।

कहा कि एक-दो दशक पहले पर्यावरण स्थिरता पर कोई ध्यान नहीं देता था। अब पर्यावरण स्थिरता पर सबसे ज्यादा फोकस है। चाहे पानी हो या हवा, हमें भविष्य के लिए बेहतर पर्यावरण छोड़ कर जाना होगा। मुझे खुशी है कि टाटा समूह पहले से ही पर्यावरण के प्रति सजग है। हमारा उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना नहीं है, हम पहले से ही पर्यावरण स्थिरता पर ध्यान दे रहे हैं। यदि हमें भविष्य में भी जीवित रहना है तो कार्बन उत्सर्जन को कम करना होगा। उन्होंने कहा कि देश के सभी उद्योगों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग बढ़ता जा रहा है और यह भविष्य में भी बढ़ेगा। इसका मतलब यह कतई नहीं होना चाहिए कि मशीनीकरण बढऩे से नौकरियां कम हो जाएंगी। तकनीक हमें गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद करती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मैनपावर का रिप्लेसमेंट नहीं समझना चाहिए। 

युवाओं को समय के अनुरूप करें दक्ष

चंद्रशेखरन ने कहा कि दो दशक पूर्व किसी कंपनी में जो दक्षता चाहिए थी, वर्तमान समय में वह बदल गया है। हमें 21वीं सदी की सोच के आधार पर दक्ष कर्मचारियों की जरूरत है। प्रबंधन को चाहिए कि युवाओं को समय के अनुरूप स्किल्ड करे। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में हमें नया इको सिस्टम विकसित करना चाहिए। बताया कि वर्तमान में एक वाहन निर्माता कंपनी कार बनाती है, फिर से डीलर को देती है और फिर डीलर उसे उपभोक्ताओं तक पहुंचाते हैं। लेकिन नए इको सिस्टम के तहत हमें नया चेन विकसित करना चाहिए। जिससे मैन्युफैक्चर सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच सके। पांचवे मंत्र के रूप में जियो पॉलिटिक्स की चर्चा करते हुए कहा कि किसी भी कंपनी की सफलता के लिए उसे सचेत रहना चाहिए कि वैश्विक परिवेश में किस तरह का बदलाव आ रहा है। बाजार की मांग के अनुसार जब हम उत्पादन करेंगे तो इसका हमें ही फायदा होगा। 

यूनियन ने दिया है अनुभवी नेतृत्व का परिचय

चेयरमैन ने कहा कि टाटा वर्कर्स यूनियन हमेशा से अनुभवी (मैच्योर लीडरशिप) नेतृत्व का परिचय दिया है। हर चुनौती का सामना करने में प्रबंधन का सहयोग किया, इसके कारण ही आज हम इस मुकाम पर हैं। मुझे विश्वास है कि हमें भविष्य में भी ऐसा सहयोग यूनियन से मिलता रहेगा। उन्होंने कहा कि 110 वर्ष पुरानी टाटा स्टील और 100 वर्ष पुरानी यूनियन ने जब मिलजुल कर काम किया तभी हम दुनिया के लिए बेंचमार्क बन पाए। उन्होंने कहा कि टाटा वर्कर्स यूनियन मेरे लिए दूसरे घर के समान है। मैं जब भी जमशेदपुर आया, यहां जरूर आया हूं। 

सामंजस्य बनाकर 100 वर्षो तक यूनियन चलाना बड़ी बात : नरेंद्रन

 टाटा स्टील के सीईओ सह एमडी टीवी नरेंद्रन ने टाटा वर्कर्स यूनियन नेतृत्व की तारीफ की। कहा कि यह बड़ी बात है कि सौ वर्षो तक यूनियन के पूर्व नेताओं ने प्रबंधन के साथ सामंजस्य स्थापित किया और सफलता पूर्वक यूनियन चलाया। यह इत्तफाक ही है कि 21वी शताब्दी में टाटा स्टील, नीदरलैंड स्थित हमारी एक और कंपनी और टाटा वर्कर्स यूनियन ने सौ वर्ष पूरे किए। 

चेयरमैन हमारे दामाद हैं : नरेंद्रन

अपने संबोधन की शुरूआत में नरेंद्रन ने कहा कि चेयरमैन एन चंद्रशेखरन हमारे दामाद की तरह हैं। इनकी पत्नी का जन्म जमशेदपुर में हुआ और सेक्रेट हार्ट कान्वेंट स्कूल से ही पढ़ाई की है। इसलिए वे हमारे शहर के लिए दामाद की तरह है। 

चंद्रशेखरन ने दिया अंग्रेजी में भाषण

टीवी नरेंद्रन सहित चंद्रशेखरन ने भाषण अंग्रेजी में दिया। उन्होंने डेवलपिंग ह्यूमन कैपिटल-की ऑफ सक्सेस (श्रमधन का विकास-सफलता की कुंजी) पर बोले। लगभग 18 मिनट तक उन्होंने अपना पूरा भाषण अंग्रेजी में दिया। लेकिन टाटा वर्कर्स यूनियन के कई कमेटी मेंबरों को यह समझ में नहीं आया। 

ये रहे उपस्थित 

वाइस प्रेसिडेंट (सीएस) चाणक्य चौधरी, अवनीश गुप्ता, उत्तम सिंह, एसडी त्रिपाठी, संजीव पॉल, टीक्यूएम एंड स्टील बिजनेस के पूर्व प्रेसिडेंट आनंद सेन, टाटा मोटर्स के प्लांट हेड विशाल बादशाह, इंडियन स्टील एंड वायर प्रोडक्ट के एमडी नीरज कांत सहित अन्य। 

Posted By: Rakesh Ranjan

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