निर्मल, जमशेदपुर : सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री अपने नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है। मामला सिंहभूम चैंबर के 27 सिंतबर 2018 को कराए गए 67वीं वार्षिक आमसभा (एजीएम) से जुड़ा हुआ है। चैंबर के अधिकारियों ने एजीएम के दौरान सदन में कई बिंदुओं पर संविधान संशोधन का प्रस्ताव रखा और बिना किसी ठोस चर्चा के हाथ उठाकर अधिकतर प्रस्तावों को पास करा लिया। जबकि कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 108 के तहत यदि सदस्यों की संख्या 1000 से ज्यादा हो तो आम सभा में ई वोटिंग करानी होगी। ऐसी व्यवस्था रांची स्थित फेडरेशन चैंबर ऑफ कॉमर्स में भी प्रभावी है। सिंहभूम चैंबर में चुनाव नजदीक है, ऐसे में सिंहभूम चैंबर में राजनीतिक घमासान फिर से तेज होने वाला है।

इसी मामले में टीम परिवर्तन के सदस्य संदीप मुरारका ने एजीएम की प्रक्रिया में संविधान संशोधन को लेकर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में चुनौती दी है। ट्रिब्यूनल ने मामले में संज्ञान लेते हुए सिंहभूम चैंबर के अधिकारियों को सभी आपत्तियों का एक पुलिंदा भेजकर नोटिस का जवाब मांगा है। इस पूरे मामले के याचिकाकर्ता अब सवाल उठा रहे है कि आखिर 1950 से संचालित इस संस्था को ऐसी क्या जरूरत पड़ी जो सरकार द्वारा बनाए नियमों का उल्लघंन कर रही है।

रिटर्न में दिखाया मात्र 48 सदस्यों की संस्था

सिंहभूम चैंबर ने कंपनी अधिनियम की धारा 92 के तहत 31 मार्च 2018 को जो वार्षिक रिटर्न, एमजीटी-7 समर्पित किया है, उसमें सदस्यों की संख्या मात्र 48 दिखाया है जबकि सदस्यों की संख्या 1000 से ज्यादा है।

-

एजीएम में इन बिंदुओं पर दिया गया था संशोधन का प्रस्ताव

-धारा 73 के तहत केवल तीन पदाधिकारी ही चैंबर के निदेशक मंडल (अध्यक्ष, महासचिव व उपाध्यक्ष टैक्स एंड फायनांस) होंगे।

-साझेदार के स्थान पर दो प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं।

-फर्म का मालिक या उसके द्वारा प्रतिनियुक्त दो प्रतिनिधि चैंबर का सदस्य होगा।

-किसी बैठक में अनुपस्थित होने की जानकारी लिखित, इलेक्ट्रॉनिक मोड, डिजीटल मोड द्वारा सिर्फ महामंत्री को देना होगा।

-एजीएम की जानकारी समाचार पत्रों की प्रतिबद्धता हटाकर सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक मोड को मान्य रखना है।

-उम्मीदवारों की सूची के प्रकाशन के बाद मतदाता की सूची मिलेगी।

-40 (ए) के तहत ट्रस्टी के पावर को समाप्त। क्या कहते हैं पदाधिकारी

-चैंबर को एनसीएलटी से चिट्ठी जरूर आई है और यह संवैधानिक मामला जरूर है लेकिन इस मामले को महासचिव विजय आनंद मूनका और उपाध्यक्ष दिनेश चौधरी देख रहे हैं। अगर कहीं गलती हुई है तो चैंबर पेनाल्टी देगा।

-अशोक भालोटिया, अध्यक्ष -एनसीएलटी से नोटिस आया है लेकिन आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है। रही बात सदस्यों की संख्या कम दिखाने की तो चैंबर में एके श्रीवास्तव, आरएन गुप्ता, मुरलीधर केडिया, सुरेश सोंथालिया, श्रवण काबरा और प्रभाकर सिंह भी महासचिव रहे हैं। उनके कार्यकाल से ही इतने ही सदस्यों की संख्या दिखाई जा रही है। अगर गलती थी तो इन्होंने क्यों नहीं उसे ठीक किया। टीम परिवर्तन अपनी हार को पचा नहीं पा रही है। इसलिए मनगंढ़त आरोप लगा रही है। मामला एनसीएलटी में विचाराधीन है। इसलिए मैं आरोप सहीं है या गलत है, इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।

-विजय आनंद मूनका, महासचिव

--

हां मैने एनसीएलटी कोलकाता बेंच में संस्था और सदस्यों के हितों के मामले को लेकर अपील दायर की है। चूंकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए इस पर मैं कुछ कहने में असमर्थ हूं। लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि किसी भी जिम्मेदार संस्थान को चाहिए कि वह अपने दस्तावेजों को पारदर्शी, स्पष्ट, पूर्ण और त्रुटि मुक्त रखे। चैंबर में इसका नितांत अभाव है।

-संदीप मुरारका, याचिकाकर्ता सह चैंबर सदस्य।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप