जमशेदपुर (दिलीप कुमार)। Jharkhand Election Result 2019 ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र की विधायक चुने जाने का प्रमाण पत्र मिलते ही सविता महतो भावुक हो गई। उन्होंने घर पहुंचते ही सबसे पहले नम आंखों से अपने पति सुधीर महतो की तस्वीर पर मत्था टेक दिया। आंखों से आंसू की धार बह निकली। मानो अपने दिवंगत पति से उनकी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए इजाजत मांग रही हो।

पति  सुधीर महतो की राजनीतिक विरासत संभालने की चुनौती 

अपने दूसरे प्रयास में ईचागढ़ विधानसभा सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा जीत दर्ज करनेवाली सविता महतो ने इस सीट से पहली महिला विधायक होने का रिकार्ड कायम किया है। अब उनके समक्ष उस परिवार की राजनीतिक विरासत को न केवल संभालने बल्कि आगे ले जाने की चुनौती है जिस परिवार ने झारखंड अलग राज्य गठन में अहम भूमिका निभाई। दरअसल, सविता महतो अलग झारखंड राज्य आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले शहीद निर्मल महतो के अनुज पूर्व उप मुख्यमंत्री स्व. सुधीर महतो की पत्नी है।

निर्मल महतो की कर्मभूमि ईचागढ़ थी, तो उनकी हत्या के बाद उनकी विरासत संभालने राजनीति के अखाड़े में उतरे सुधीर महतो ने दो बार ईचागढ़ का प्रतिनिधित्व किया। इसी विस क्षेत्र से चुनाव जीतकर ही सुधीर महतो राज्य के उप मुख्यमंत्री बने थे। उनकी अकस्मात मृत्यु के बाद परिवार का सारा दारोमदार सविता महतो के कंधे पर आ गया।

निर्मल महतो झारखंड अलग राज्य के आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने के साथ एक कुशल नेतृत्वकर्ता भी थे। ईचागढ़ के विकास के लिए वे जीवनपर्यंत सक्रिय रहे। वर्ष 1982 में ईचागढ़ के तत्कालीन प्रखंड मुख्यालय तिरुलडीह में हुए गोलीकांड में दो छात्रों की मौत हो गई। हालात कुछ ऐसे थे कि शहीद हुए छात्रों के अंतिम संस्कार के लिए कोई आगे नहीं आना चाह रहा था।

ऐसे में निर्मल महतो ने ही हिम्मत दिखाई और पोस्टमार्टम हाउस से शव ले जाकर जयदा में स्वर्णरेखा नदी के किनारे दोनों का अंतिम संस्कार कराया। आठ अगस्त 1987 को निर्मल महतो की हत्या  के बाद उनके अनुज सुधीर महतो ने परिवार की राजनीतिक विरासत को संभाला। ईचागढ़ की जनता ने उन्हें हाथोहाथ लिया और दो बार अपना जनप्रतिनिधि बनाया। सुधीर महतो राज्य के उप मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे। 22 जनवरी 2014 में हार्ट अटैक से हुई उनकी अचानक मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारी सविता महतो पर आ गई। 

उन कठिन परिस्थितियों में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने सविता का साथ दिया और 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें सुधीर महतो की परंपरागत ईचागढ़ सीट से अपना प्रत्याशी बनाया। पहली बार चुनाव में सविता महतो को ईचागढ़ ने जीत का जनादेश नहीं दिया। वे दूसरे स्थान पर रहीं। 2014 के विधानसभा चुनाव में पहली बार किस्मत आजमा रही सविता को कुल 33384 मत मिले थे। वहीं इस बार 2019 के चुनाव में मतदाताओं ने उन्हें निर्मल व सुधीर महतो की विरासत को आगे बढ़ाने का जनादेश दिया। उनकी यह जीत कई मायनों में ऐतिहासिक रही। वे ईचागढ़ की पहली महिला विधायक बनी। पति के अधूरे विकास कार्यो को पूरा करने का वादा कर मतदाताओं का समर्थन पाने के बाद अब उनके समक्ष क्षेत्र की जनता की उन अपेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती होगी जिनकी वजह से निर्मल महतो व उनके बाद सुधीर महतो को यहां की जनता का समर्थन मिलता रहा।

करना होगा विस्थापितों के लंबित मामलों का निदान

 चुनाव जीतने के बाद अब अपने वादे के मुताबिक सविता महतो को चांडिल डैम के विस्थापितों के लंबित समस्याओं के निदान करने के लिए सार्थक पहल करना होगा। इसके साथ ही क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, बिजली, सिंचाई, रोजगार आदि पर विशेष रूप से काम करने की जरूरत है। एक दशक पूर्व बने अनुमंडल अस्पताल को शुरू करवाने, चाडिल को पूर्ण अनुमंडल का दर्जा दिलाने आदि पर पहल करना होगा।

Posted By: Vikas Srivastava

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