झारखंड की राजनीति में हलचल: भाजपा नेताओं के साथ मंच साझा करने के बाद चर्चाओं में आए सरयू, जानिए सियासी मायने
रांची में भाजपा नेताओं के साथ सरयू राय के मंच साझा करने से झारखंड की राजनीति में उनकी भाजपा वापसी की अटकलें तेज हो गई हैं।

रांची में पदयात्रा के दौरान भाजपा के प्रमुख नेताओं के साथ सरयू राय।
HighLights
सरयू राय ने रांची में भाजपा नेताओं के साथ मंच साझा किया।
इस घटना से उनकी भाजपा में वापसी की अटकलें तेज हुईं।
उन्होंने राहुल गांधी के 'मॉक पार्लियामेंट' को 'मजाक' करार दिया।
जासं, जमशेदपुर। झारखंड की राजनीति में अपने बेबाक तेवर और अप्रत्याशित राजनीतिक फैसलों के लिए पहचाने जाने वाले जमशेदपुर पश्चिम के जदयू विधायक सरयू राय ने एक बार फिर सियासी हलचल बढ़ा दी है।
सोमवार को रांची में भाजपा नेताओं के साथ एक मंच पर उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए।
खासकर भाजपा के भीतर उनकी संभावित वापसी को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। इंटरनेट मीडिया पर इन अटकलों को और हवा मिली।
हालांकि, फिलहाल भाजपा में उनकी वापसी की चर्चाओं का कोई ठोस आधार नहीं है। दरअसल, सरयू राय ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य प्रसाद साहू के आग्रह पर एनडीए के कार्यक्रम में शिरकत की थी।
सरयू राय का भाजपा से पुराना रिश्ता रहा है। वे लंबे समय तक पार्टी में रहे और संगठन तथा सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के साथ राजनीतिक और व्यक्तिगत मतभेदों के कारण 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा का टिकट नहीं मिला।
इसके बाद उन्होंने अपनी परंपरागत सीट जमशेदपुर पश्चिम के बजाय जमशेदपुर पूर्वी से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया।
यहां उनका मुकाबला खुद तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास से था। चुनाव परिणाम ने झारखंड सहित पूरे देश की राजनीति को चौंका दिया। सरयू राय ने रघुवर दास को पराजित कर विधानसभा पहुंचने में सफलता हासिल की।
2024 के विधानसभा चुनाव से पहले राय ने जनता दल यूनाइटेड का दामन थाम लिया। भाजपा और जदयू के बीच सीटों के तालमेल के तहत उन्हें जमशेदपुर पश्चिम से उम्मीदवार बनाया गया।
उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी बन्ना गुप्ता को पराजित कर विधानसभा में अपनी जगह बनाई। इस तरह राजनीतिक दल बदलने के बावजूद भाजपा के साथ उनके वैचारिक संबंधों और पुराने संपर्कों की चर्चा लगातार होती रही है।
आरएसएस के कार्यक्रमों में लगातार सक्रियता
भाजपा से अलग होने के बाद वे पार्टी के सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रमों में सामान्यतः नजर नहीं आते थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी अक्सर देखी जाती रही है।
वैचारिक स्तर पर भाजपा से उनकी निकटता और पुराने रिश्तों के कारण उनकी राजनीतिक स्थिति को लेकर हमेशा उत्सुकता बनी रही।
इसी पृष्ठभूमि में सोमवार को रांची में भाजपा नेताओं के साथ उनका मंच साझा करना खासा महत्वपूर्ण माना गया। भाजपा की ओर से आयोजित लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ पदयात्रा में सरयू राय की मौजूदगी ने उन चर्चाओं को फिर जीवित कर दिया, जो उनके भाजपा से पुराने रिश्तों को लेकर समय-समय पर उठती रही हैं।
पदयात्रा कार्यक्रम के दौरान सरयू राय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी की ओर से आयोजित मॉक पार्लियामेंट को 'मजाक पार्लियामेंट' करार दिया।
उनके इस बयान ने भी राजनीतिक चर्चा को और तेज किया। बहरहाल, सरयू राय की राजनीति में भाजपा से दूरी और वैचारिक निकटता का यह विरोधाभास नया नहीं है।
लेकिन भाजपा के मंच पर उनकी मौजूदगी ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि आने वाले दिनों में उनके और भाजपा के रिश्तों की दिशा क्या होगी।
फिलहाल इतना तय है कि एक मंच साझा करने भर से राजनीतिक वापसी का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी है।