जमशेदपुर, जासं। आमतौर पर यही माना जाता है कि सर्पगंधा का पौधा जहां लगाया जाता है, वहां सांप नहीं आते हैं। सांप काटने का उपचार भी इसकी जड़ य पत्ते के रस से किया जाता है, लेकिन इसके कई उपयोग हैं।  जमशेदपुर की आयुर्वेद व प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ सीमा पांडेय बताती हैं कि गर्भवती महिलाओं के लिए सर्पगंधा के अर्क का बहुत ही महत्व हैं। इस पौधे की जड़ का अर्क प्रसव पीड़ा के दौरान बच्चे के जन्म को सुलभ बनाने के लिए दिया जाता है।

सर्पगंधा के अर्क को देने से बच्चेदानी के संकुचन को बढ़ाने में काफी सहायता मिलती है। सर्पगंधा की जड़ के अर्क का उपयोग हिस्टीरिया तथा मिर्गी के उपचार में भी किया जाता है। घबराहट तथा पागलपन के उपचार में सर्पगंधा की जड़ का प्रयोग किया जाता है। पारंपारिक चिकित्सा पद्धति में सर्पगंधा की जड़ का उपयोग ज्वर या बुखार, अतिसार, अनिद्रा, हैजा आदि के उपचार में किया जाता है। सर्पगंधा वनस्पति की जड़ का रस या अर्क उच्च रक्तचाप या हाई ब्लड प्रेशर की एक बहुमूल्य औषधि है। इसकी जड़ का अर्क चेहरे पर उभरे हुए फोड़े-फुंसियों को दूर करने के उपचार में किया जाता है।

आंख की रोशनी बढ़ाता : सर्पगंधा की पत्तियों का रस हमारी आंखों के लिए बहुत ही उपयोगी है। यदि हम सर्पगंधा की पत्तियों का रस नियमित रूप से अपनी आंखों मे डालें, तो हमारी आंखों की रोशनी बढ़ाने में काफी सहायता प्राप्त होती है।

सांप काटने पर : सांप के काटने पर सर्पगंधा की जड़ का पाउडर मरीज को खिलाया जाता है। यह चूर्ण या पाउडर सांप द्वारा काटे गए स्थान पर भी लगाया जाता हैं। सांप या किसी अन्य कीड़े के काटने पर भी सर्पगंधा का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है। यह एक बहुत ही बहुमूल्य विषनाशक है।

तनाव : सर्पगंधा हमारे मानसिक तनाव, चिंता तथा उत्तेजना को कम करने में भी बहुत सहायक है।

कब्ज : कब्ज जैसी बीमारी दूर करने में सर्पगंधा का उपयोग काफी प्रभावशाली माना गया है।

उच्च रक्तचाप : सर्पगंधा हमारे हृदय की बढ़ती हुई गति को सामान्य करता है।

जमशेदपुर की आयुर्वेद व प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ सीमा पांडेय ।

Edited By: Rakesh Ranjan