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87 की उम्र, रूहानी आवाज: जब संतोष आनंद ने जमशेदपुर में छेड़ी'जिंदगी की न टूटे लड़ी...

Published: Sun, 01 Mar 2026 01:00 AM (IST)

सुरभि संस्था के 26वें हास्य कवि सम्मेलन में 87 वर्षीय गीतकार संतोष आनंद मुख्य आकर्षण रहे। जमशेदपुर में उन्होंने अपनी ...और पढ़ें

संतोष आनंद, गीतकार।

संतोष आनंद, गीतकार।

HighLights

  1. सुरभि के 26वें हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन जमशेदपुर में हुआ।

  2. कवियों ने हास्य, व्यंग्य और शृंगार रस से श्रोताओं को गुदगुदाया।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर । लौहनगरी की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था सुरभि का 26वां हास्य कवि सम्मेलन शनिवार की शाम स्मृतियों के नाम रहा। नर्भेराम हंसराज स्कूल के प्रेक्षागृह में आयोजित इस समारोह का मुख्य आकर्षण रहे कालजयी गीतकार संतोष आनंद। 
 
87 वर्ष की आयु और शारीरिक अस्वस्थता के बावजूद जब उन्होंने अपनी सुप्रसिद्ध रचना 'जिंदगी की न टूटे लड़ी...' छेड़ी, तो पूरा सदन उनके सम्मान में खड़ा हो गया। 

भावुक कर गई संतोष आनंद की रूहानी आवाज 

मंच पर संतोष आनंद ने सिद्ध कर दिया कि कला उम्र की मोहताज नहीं होती। अपनी पीड़ा को शब्दों में पिरोते हुए उन्होंने जब पढ़ा- मिलते ही मुझे जिंदगी बेकार हो गई, चारागाहों की हर दवा बेकार हो गई..., तो श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।
 
उन्होंने अपनी नई रचना जिंदगी हर जगह नहीं होती, दिल को लेकर फिरो बाजारों में... के जरिए जीवन के फलसफे को रेखांकित किया। उनकी पंक्तियां- तुम्हीं से प्यार करता हूं, तुम्हीं पर जान देने आया हूं, आखिरी वक्त है इम्तिहान देने आया हूं... ने माहौल को भावुक कर दिया। 

हास्य, व्यंग्य और शृंगार का संगम 

गंभीर भावनाओं के बीच हास्य के फव्वारों ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया:

  •     डॉ. आदित्य जैन: उन्होंने अपनी फिल्मी पैरोडी के जरिए पड़ोसी देश पाकिस्तान पर तीखे तंज कसे और राजनीतिक परिस्थितियों पर भी कटाक्ष किया।
  •     मुन्ना बैटरी (मंदसौर): उन्होंने वैवाहिक जीवन और आधुनिक रिश्तों पर चुटकी लेते हुए कहा कि सालियों को अब जूते नहीं, जीजा का मोबाइल चुराना चाहिए क्योंकि सारे राज वहीं कैद हैं।
  •     शशि श्रेया (लखनऊ): शृंगार रस की कवयित्री ने अपनी पंक्तियों तुम्हारे लिए गाल बचा रखे हैं... से युवाओं को रिझाया।
  •     हिमांशु बवंडर और श्रद्धा शौर्य: उज्जैन के हिमांशु ने पुरुष उपेक्षा पर व्यंग्य किया, वहीं श्रद्धा शौर्य ने रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य गान से श्रोताओं में जोश भर दिया। 

साहित्यिक परंपरा का सम्मान 

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथि अमरप्रीत सिंह काले और संस्था अध्यक्ष गोविंद अग्रवाल दोदराजका ने कवियों को पगड़ी पहनाकर और स्मृति चिह्न देकर किया। अध्यक्ष गोविंद अग्रवाल ने इस साहित्यिक परंपरा को निरंतर जारी रखने का संकल्प दोहराया। 

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