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रूपी सोरेन का निधन: गम में डूबीं सीएम हेमंत सोरेन की फुआ, पुरानी यादों से भावुक हुआ चाकुलिया गांव

Published: Thu, 08 Oct 2026 02:32 PM (IST)

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की फुआ सुखी टुडू अपनी भाभी रूपी सोरेन के निधन से गहरे सदमे में हैं, जिन्होंने पहले भी कई परिजनों को खोया है।

बेटे हेमंत और पति शिबु सोरेन के साथ रूपी सोरेन। PTI File Image

बेटे हेमंत और पति शिबु सोरेन के साथ रूपी सोरेन। PTI File Image

सुधीर गोराई, नीमडीह। अपनों को खोने का दर्द क्या होता है, यह चाकुलिया गांव की सुखी टुडू के जीवन से समझा जा सकता है। तीन बेटों, पांच भाइयों और दो भाभियों को खोने का गम झेल रहीं सुखी टुडू को अब अपनी भाभी रूपी सोरेन के निधन की खबर ने भीतर तक तोड़ दिया है।

झारखंड आंदोलन के प्रणेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन के निधन की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बड़ी फुआ सुखी टुडू गुरुवार सुबह अपने मायके नेमरा के लिए रवाना हो गईं।

उनके लिए यह केवल एक पारिवारिक सदस्य को खोने की खबर नहीं, बल्कि रिश्तों और पुरानी स्मृतियों से जुड़े एक दौर के समाप्त होने जैसा है। चांडिल प्रखंड के चाकुलिया गांव से सोरेन परिवार का रिश्ता वर्षों पुराना है। सुखी टुडू का विवाह चाकुलिया के जमींदार रहे दिवंगत विजय टुडू से हुआ था।

पारिवारिक संबंधों के कारण शिबू सोरेन का भी इस क्षेत्र में आना-जाना शुरू हुआ। बताया जाता है कि अपने जीजा विजय टुडू के संरक्षण और सहयोग के बीच शिबू सोरेन ने इस इलाके में झारखंड आंदोलन की अलख जगाने का काम किया।

यही वह दौर था, जब क्षेत्र की धरती पर आंदोलन की आवाज बुलंद हो रही थी और अलग झारखंड राज्य की मांग जनांदोलन का रूप ले रही थी। इसी पारिवारिक जुड़ाव के दौरान शिबू सोरेन और रूपी सोरेन के विवाह का संबंध भी जुड़ा।

इस तरह चाकुलिया गांव केवल सुखी टुडू का ससुराल ही नहीं रहा, बल्कि सोरेन परिवार के साथ आत्मीय रिश्तों की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गया। समय के साथ परिवार की कई पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन इस गांव और सोरेन परिवार के बीच संबंधों की डोर बनी रही।

रिश्तों के साथ जुड़ी हैं आंदोलन की स्मृतियां

चाकुलिया की इस पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाने वालों में सुखी टुडू के भांजे और उनके बड़े पुत्र कपूर टुडू उर्फ कपूर बागी का नाम भी महत्वपूर्ण है। स्वर्गीय कपूर टुडू झारखंड आंदोलन के प्रखर आंदोलनकारी रहे। पारिवारिक रूप से सोरेन परिवार के निकट होने के बावजूद उन्होंने अपनी पहचान और संघर्ष को अलग रखा।

उन्होंने अपने परिवार के राजनीतिक संबंधों या बड़े नेताओं से निकटता के सहारे नहीं, बल्कि अपने दम पर समाज और क्षेत्र के विकास के मुद्दों पर आवाज उठाई। आंदोलन और जनहित के सवालों पर उनकी सक्रियता ने उन्हें इलाके में अलग पहचान दिलाई।

कपूर टुडू के निधन के बाद उनके श्राद्ध कर्म में रूपी सोरेन अंतिम बार चाकुलिया आई थीं। उस समय सोरेन परिवार के अन्य सदस्य भी गांव पहुंचे थे।

परिवार के लोगों और ग्रामीणों के लिए वह मुलाकात आत्मीय रिश्तों को फिर से महसूस करने का अवसर थी। अब रूपी सोरेन के निधन की खबर ने उसी स्मृति को एक बार फिर ताजा कर दिया है।

गांव में पसरा शोक, पुरानी यादें हुईं ताजा

सुखी टुडू की बड़ी पुत्रवधू और स्वर्गीय कपूर टुडू की पत्नी सुकुरमनी टुडू ने बताया कि रूपी सोरेन का चाकुलिया गांव से पुराना और आत्मीय संबंध रहा है। सोरेन परिवार के सदस्य पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए यहां आते रहे हैं।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का भी गांव से पारिवारिक जुड़ाव रहा है। यही कारण है कि रूपी सोरेन के निधन की खबर से परिवार के साथ-साथ गांव के लोग भी भावुक हैं। सुखी टुडू के जीवन में एक के बाद एक अपनों का बिछड़ना गहरे दुख का कारण रहा है।

तीन बेटों, पांच भाइयों और दो भावियों को खोने के बाद अब भाभी रूपी सोरेन का निधन उनके लिए एक और असहनीय क्षति बनकर आया है। नेमरा के लिए उनकी रवानगी के साथ चाकुलिया में भी पुरानी यादों और पारिवारिक संबंधों की चर्चा होने लगी है।

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