जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आज 90 वर्ष पूरे हो गए हैं। विजयादशमी से 91वां वर्ष प्रारंभ हो जाएगा। 1925 में जब डॉ. हेडगेवार ने संघ की स्थापना की थी, तो उनके साथ कुछ ही लोग थे। डॉ. हेडगेवार की भी उम्र करीब 35 वर्ष थी लेकिन आज पांच पीढिय़ां संघ में हैं। हमने हजारों कार्यकर्ता तैयार किए हैं। संघ का रूप आज इतना विशाल हो गया है कि देश-दुनिया में इसके बारे में लोग जानना चाहते हैं। पिछले दिनों रतन टाटा नागपुर आए। उन्होंने संघ के कुछ कार्यों को पहली बार देखा। कार्यालय में उनसे (मोहन भागवत) मिले। टाटा ने पूछा कि वह संघ की शाखा देखना चाहते हैं। आपके प्रोसेस में क्या है जो स्वयंसेवक ऐसा बनता है। आप कैसे बनाते हैं ऐसे स्वयंसेवक।

सरकार तो नौकर, जनता असली मालिक: भागवत

ये बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक डॉ. मोहन भागवत ने रविवार को कहीं।


बिष्टुपुर स्थित साउथ पार्क मैदान में 'महानगर एकत्रीकरण' में स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि संघ के बारे में लोग कई तरह के प्रश्न पूछते हैं, लेकिन इनमें से 99 प्रतिशत प्रश्नों का संघ से कोई मतलब नहीं होता। अब संघ की ओर समझदार लोगों का ध्यान आ रहा है। रतन टाटा भी समझदार हैं, इतना बड़ा उद्योग चलाते हैं। डॉ. भागवत ने स्वयंसेवकों से ही पूछा, समाज पर संघ का इतना प्रभाव कैसे पड़ा। फिर खुद जवाब दिया। कहा, शाखा यंत्रवत नहीं चलती। जब आप नित्यप्रति शाखा की साधना करेंगे तो बन जाएंगे। बताना नहीं पड़ेगा। भागवत ने करीब 55 मिनट के संबोधन में स्वयंसेवकों को कई उदाहरण देकर संघ के बारे में बताया।

उन्होंने कहा, संघ स्वदेशी, आत्मीयता, अनुशासन व निष्ठा भाव से चलता है। जब तक आप संघ के इन गुणों को अपने व्यक्तिगत आचरण में नहीं लाएंगे, तब तक स्वयंसेवक नहीं बनेंगे। आप समाज में अपने आचरण से आदर्श प्रस्तुत करें, तब समाज आपका अनुसरण करेगा। इस देश में समाज सिर्फ महापुरुषों की पूजा करता है। उनके जीवन को आचरण में नहीं लाते, लेकिन हम अपने जीवन का रेखांकन उनके अनुसार करते हैं। समाज अपने बीच के आदर्श व्यक्ति का ही अनुसरण करता है। हमें ऐसा ही स्वयंसेवक बनाना है, जो समाज को गढ़े। तभी संघ के साथ-साथ देश की वृद्धि होगी। इस मौके पर उत्तर-पूर्व क्षेत्र संघ चालक सिद्धिनाथ सिंह, झारखंड प्रांत संघ चालक देवव्रत पाहन, जमशेदपुर संघ चालक वी. नटराजन मंचस्थ थे, जबकि झारखंड सरकार के मंत्री सरयू राय, सांसद विद्युत वरण महतो, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेशानंद गोस्वामी, आदित्यपुर स्माल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (एसिया) के अध्यक्ष इंदर अग्रवाल समेत हजारों स्वयंसेवक उपस्थित थे।

मालिक सुस्त, तो नौकर कैसे चुस्त
आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने पूछा, देश का भाग्य बदलने वाली सरकार होती है क्या? फिर कहा, सरकार तो एक माध्यम है, देश चलाने का। यह काम समाज का है। वही इस देश का मालिक है। सरकार तो नौकर है। नौकर तब तक चुस्त रहेगा, जब मालिक चुस्त रहेगा। हमें समाज का आचरण बदलना है। उसके जीवन में अनुशासन लाना है। एक-एक स्वयंसेवक समाज से व्यापक संपर्क करे। अपने भाषण से नहीं, कृतित्व से आदर्श प्रस्तुत करे। रोज एक घंटे की शाखा में चिंतन करना है कि हम कहां तक पहुंचे, आगे क्या करना है। ऐसा करने से वातावरण बनेगा।

हम हिंदू राष्ट्र के घटक
मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों से कहा कि हम सब हिंदू राष्ट्र के घटक हैं। हिंदू राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के घटक हैं, अंग हैं। उनके गढऩे वाले हैं। हमें सदा अंग बनकर ही रहना है। शरीर से अलग किसी अंग का अस्तित्व होता है क्या। कटी हुई अंगुली सड़ जाती है, मर जाती है। हम अंग के नाते सदा उससे संलग्न रहेंगे। संघ गढऩे के लिए दूसरा आवश्यक घटक है अनुशासन का पालन खुद करना लेकिन हर काम पूरा करने की प्रक्रिया होती है। संघ प्रचारकों से नहीं, एक-एक स्वयंसेवक से बनता है। देश के एक-एक व्यक्ति, पशु-पक्षी से आत्मीयता करना है। आत्मीयता का रूपांतरण मोह में नहीं होगा। अपनी दोस्ती बढ़ाकर संगठित रूप से काम करें। सब सहयोग करके देश को संपन्न करेंगे। समाज हमको देख भी रहा है और समाज हमारे बताए रास्ते पर चलना भी चाहता है। शहरों की प्रत्येक बस्ती और गांव में आदर्श लोगों की टोलियां खड़ी करना है। अपने उदाहरण से समाज में परिवर्तित आचरण लाना है।
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संघ में कोई भेदभाव नहीं
आजकल अंग बनाने के लिए स्टेम सेल टेक्नोलॉजी और क्लोनिंग टेक्नोलॉजी भी आयी है, जो शरीर की कोशिका से अंग का निर्माण कर देती है। प्रत्येक कोशिका में उसका बीज रहता है। संघ के साथ इतनी ही तन्मयता से जुड़ें। हम संघ में आए, लेकिन हममें संघ कितना अंदर आया, यह देखना है। संघ में कोई भेदभाव नहीं है। मैं सबको अपना मानता हूं कि नहीं, यह देखना है। मेरा व्यवहार आचरण संघ को अभिव्यक्त करता है, तब संघ बनता है।

संघ ट्रेन, हम यात्री
मोहन भागवत ने कहा कि संघ एक ट्रेन है और हम सब उसके यात्री। मैं संबलपुर से यहां आया और जब निवास पर पहुंचा, तो कुछ लोग उनसे पहले पहुंच गए थे। उन्होंने पूछा कैसे आए। उन्होंने कहा कि मैं तो आया नहीं। यहां आने का काम ट्रेन ने किया, मैं तो बैठा रहा। निवास तक भी वाहन लाया। हम भी संघ के साथ इसी तरह चलते हैं। सब स्वयंसेवक चलेंगे तो संघ की गति चलती रहेगी। संघ की गाड़ी की गति ठीक रखने के लिए मैं कितना चलता हूं, यह आवश्यक है।

गंतव्य भूले तो भटक जाएंगे
भागवत ने कहा कि जब वे संबलपुर से यहां आए, तो रास्ते में पुलिया आयी, जंगल भी आए। ट्रेन घूमते हुए रास्ता बदलते हुए टाटानगर तक पहुंची। इसी तरह हमें भी चलना होगा। प्रत्यक्ष चलने का रास्ता सीधा नहीं होता। यदि गंतव्य भूल गए तो रास्ता भटक जाएंगे। उन्होंने एक कहानी सुनाई। उनके एक दोस्त साइकिल से नागपुर से वर्धा चले। रास्ते में विश्राम करने के लिए सो गए। शाम को नींद खुली तो उन्होंने साइकिल उठाई और चल दिए, लेकिन विश्राम करते समय उन्होंने साइकिल का हैंडल दूसरी ओर घुमा दिया था, इसलिए वे वापस नागपुर आ गए। वास्तविक जीवन में भी ऐसा ही होता है, इसलिए गंतव्य के प्रति सदा सतर्क रहें।

काली टोपी रही अनिवार्य
महानगर एकत्रीकरण में शहर के हजारों लोग शामिल हुए, जो काली टोपी पहने हुए थे। जिनके सिर पर काली टोपी नहीं थी, वे या तो मैदान के किनारे थे या बाहर कर दिए गए। सर संघचालक के संबोधन से पहले रज्जो भैया के अमृत वचन सुनाए गए, तो अंत संघ की प्रार्थना से हुआ। मोहन भागवत ने अपने संबोधन में एक बार भी न किसी दल का नाम लिया, न किसी व्यक्ति का। उन्होंने संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार का कई बार स्मरण किया।

दर्शक दीर्घा में रहे उपस्थित
सर संघ चालक मोहन भागवत के संबोधन के दौरान दर्शक दीर्घा में अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख स्वांत रंजन, क्षेत्र प्रचारक रामदत्त चक्रधर, क्षेत्र शारीरिक शिक्षण प्रमुख अरुण कुमार, क्षेत्र सेवा प्रमुख अजय कुमार, संपर्क प्रमुख अनिल ठाकुर, प्रांत कार्यवाह नवल किशोर कर्ण, प्रांत सह कार्यवाह राकेश लाल व जमशेदपुर विभाग संघ चालक अभय सामंत भी उपस्थित थे।

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Posted By: Bhupendra Singh

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