जमशेदपुर, जासं। टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा ने एक बार फिर टाटा संस के उत्तराधिकारी को लेकर बयान जारी किया है। यह बात इसलिए हो रही है कि टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी 2022 में समाप्त हो रहा है। टाटा संस के चेयरमैन का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, लिहाजा हर पांच साल पर इसका नवीकरण किया जाता है।

चूंकि चंद्रशेखरन का कार्यकाल अगले साल ही समाप्त हो रहा है, इसलिए इस मुद्दे पर रतन टाटा ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। इस मुद्दे पर हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में कहा गया था कि चंद्रशेखरन को दूसरी बार टाटा संस का चेयरमैन बनाया जा सकता है। इस रिपोर्ट को लेकर रतन टाटा ने कहा है कि बोर्ड से विचार-विमर्श के बाद ही उत्तराधिकारी को लेकर फैसला होगा। टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन रतन टाटा ग्रुप की कंपनियों को लेकर काफी सक्रिय रहते हैं। रतन टाटा ने अपने बयान में यह भी कहा है कि टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को दूसरा कार्यकाल देने के लिए किसी ने भी उनसे संपर्क नहीं किया है। पूर्व चेयरमैन ने कहा कि वे शेयरधारकों को भरोसा दिलाते हैं कि उत्तराधिकारी के संबंध में कोई भी फैसला काफी पारदर्शी तरीके से किया जाएगा। टाटा संस के बोर्ड के साथ विचार-विमर्श के बिना उत्तराधिकारी का फैसला नहीं किया जाएगा।

रतन समेत शेयरधारक भी कर रहे चंद्रशेखन की सराहना

यह रिपोर्ट टाटा ग्रुप के कुछ अधिकारियों से बातचीत के आधार पर तैयार की गई थी। इसमें टाटा ग्रुप के अधिकारियों ने कहा था कि चंद्रशेखर के प्रदर्शन की स्टेकहोल्डर सराहना कर रहे हैं। हाल ही में टाटा संस की वार्षिक आमसभा में भी मानद चेयरमैन रतन टाटा चंद्रशेखरन की सराहना कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि चंद्रशेखरन बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं इस मुद्दे पर टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि उत्तराधिकारी तय करने को लेकर टाटा संस और बोर्ड की एक कमेटी है। कमेटी उचित समय पर उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा करेगी। उन्होंने कहा कि उत्तराधिकारी को लेकर उनकी रतन टाटा, टाटा ट्रस्ट या टाटा संस के बोर्ड से कोई बातचीत नहीं  हुई है। ऐसे मुद्दे सबसे पहले बोर्ड के सामने पेश किए जाते हैं, उसके बाद ही कोई फैसला होता है।

चंद्रशेखरन के कार्यकाल में आठ प्रतिशत बढ़ी बिक्री

टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी 2022 में समाप्त हो रहा है। तीन साल में टाटा ग्रुप की बिक्री आठ प्रतिशत बढ़ी है। वित्त वर्ष 2018 में टाटा ग्रुप की कुल बिक्री 6.5 करोड़ रुपये थी, जो वित्त वर्ष 2021 में बढ़कर 7.06 करोड़ रुपये हो गई है। इस अवधि में ग्रुप का शुद्ध लाभ 21,617 करोड़ रुपये हो गया है, जो करीब 51 प्रतिशत ज्यादा है। यहां यह बताना लाजिमी है कि समूह के कुल मुनाफे का बड़ा हिस्सा टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज से आता है।

 

Edited By: Rakesh Ranjan