भिलाई (अंशुल तिवारी)। झारखंड की सत्ता के साथ ही मुख्यमंत्री रघुवर दास खुद की सीट भी नहीं बचा सके। इसका दर्द छत्तीसगढ़ के दुर्ग तक महसूस किया गया। दुर्ग में रहने वाली रघुवर की बेटी ने कहा कि शराब और कोयले का ठेका नहीं दिलाने व स्पष्टवादिता के चलते पापा की हार हुई।

वह नतीजों को देखने सोमवार सुबह से ही टीवी से चिपकी थीं। लेकिन, पापा के दोबारा सत्ता में लौटने की आस उस वक्त टूट गई, जब उनको सियासी मैदान में पिछड़ते देखा। हार का झटका ऐसा कि अपने कमरे में जाकर खामोश बैठ गईं। मिलने वाले आते रहे, लेकिन वह कमरे से बाहर नहीं निकलीं। गौरतलब है कि झारखंड में भाजपा महज 25 सीट ही जीत सकी, जिसके चलते सत्ता उसके हाथ से चली गई।

बेटी रेणु साहू और दामाद यशपाल साहू से दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन नईदुनिया के प्रतिनिधि ने बात की। उदासी के माहौल में दामाद-बेटी के मुंह से निकला-पापा का स्पष्ट बात करने का नेचर ही हार का कारण बन गया। कार्यकर्ता और भाजपा से बगावत कर पापा के ही खिलाफ ताल ठोकने वाले सरयू राय के दुष्प्रचार ने आग में घी का काम किया, जिससे वह चुनाव हार गए। दरअसल, जब पापा मुख्यमंत्री बने तभी से कुछ कार्यकर्ताओं की बिजनेस की उम्मीद बढ़ गई थी।

किसी को दारू, किसी को कोयला का ठेका तो किसी को कुछ और चाहिए था। पापा बेहद ईमानदार ठहरे, पार्टी और प्रदेश के लिए कर्मठ हैं। वह किसी भी कार्यकर्ताओं को गलत और अनैतिक कार्य करने ही नहीं देते थे। वह तल्ख लहजे में ऐसे कार्यकर्ताओं को सीधे मना ही कर देते थे। इसी वजह से उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया जाने लगा। सरयू राय द्वारा कार्यकर्ताओं को दरकिनार करने वाले प्रश्न पर दामाद ने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है। बगैर कार्यकर्ताओं के कुछ भी संभव नहीं है। किंतु कुछ कार्यकर्ता और सरयू राय ही शुरू से दुष्प्रचार करते रहे।

गौरतलब है कि रघुवर दास की एक बेटी और एक बेटा है। बेटी की शादी दुर्ग के यशपाल से हुई है। यशपाल एनएसपीसीएल (एनटीपीसी-सेल पॉवर कंपनी लिमिटेड) में डिप्टी मैनेजर के पद पर कार्यरत हंै। यहां पद्मनाभपुर में अपने छोटे भाई और परिजनों के साथ रहते हैं।

हमसे अच्छा कोई नहीं जान सकता

रघुवर दास पर लग रहे आरोपों पर दामाद यशपाल ने कहा कि यह सफेद झूठ है, किसी शख्स को उनके परिजन से ज्यादा कोई नहीं जान सकता। इसलिए यह मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि पापा के लिए हम लोग थे ही नहीं, उनके लिए हमसे ज्यादा भाजपा परिवार और झारखंड की जनता ही मायने रखती रही है। उन्होंने पहले झारखंड और भाजपा को ही तवज्जो दिया।

कुछ लोगों को बाहरी होने से थी परेशानी

रघुवर दास के दामाद यशपाल साहू कहते हैं कि पापाजी के बाहरी होने का आंतरिक विरोध भी ङोलना पड़ा। उन्होंने कहा-छत्तीसगढ़ के साथ झारखंड बना। किंतु वहां काफी ज्यादा राजनैतिक अस्थिरता रही। वहां एक या दो वर्ष में नए सीएम बनने की खबरें आती थीं। कोई भी मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूर्ण नहीं कर पाया। इसके मुकाबले पापा (रघुवर दास) ने पांच साल का कार्यकाल पूर्ण किया और एक अस्थिर राज्य को स्थिर सरकार भी दी। इसकी हमें खुशी है।

 

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