सुधीर पांडेय, चाईबासा : दुर्गम क्षेत्र में रहने वाली गर्भवती महिला को ममता वाहन या एंबुलेंस के इंतजार में तड़पना नहीं पड़ेगा। सुरक्षित प्रसव कराने के लिए उन्हें प्रसूति प्रतीक्षालय गृह की सुविधा नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में ही मिलेगी। इसके लिए सरकार की ओर से पहल शुरू कर दी गयी है। कोल्हान के दुर्गम क्षेत्र में अवस्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में ही मातृ-शिशु के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रसूति प्रतीक्षालय बनाये जायेंगे।

प्रसूति प्रतीक्षालय में गर्भवती 10 से 15 दिन पहले आकर रह सकते हैं

इन प्रतीक्षालयों में गर्भवती को 10 से 15 दिन पहले लाकर रख दिया जायेगा। जब डिलवरी का समय आयेगा तब उसी स्वास्थ्य केंद्र में उसका सुरक्षित प्रसव कराया जायेगा। पहले चरण में चाईबासा, जमशेदपुर और सरायकेला जिला में एक-एक प्रतीक्षालय बनाया जायेगा। इसकी सफलता का आकलन करने के बाद इनका विस्तार किया जायेगा। प्रसूति प्रतीक्षालय गृह निर्माण को लेकर मातृत्व स्वास्थ्य कोषांग के नोडल पदाधिकारी ने पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिला के सिविल सर्जन को पत्र लिखकर इस संबंध में एक रिपोर्ट भी मांगी है। नोडल पदाधिकारी ने कहा कि मातृ एवं नवजात बच्चों की मृत्यु की अधिकता तथा सुदूर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा की उपलब्धता प्रदान हो सके, इसके लिए प्रसूति प्रतीक्षालय गृह निर्माण की आवश्यकता है।

एक प्रसूति प्रतीक्षालय गृह निर्माण में 25.3 लाख रुपये आएंगे खर्च

इसके लिए वित्तीय वर्ष 2021-22 के मद से 8.44 लाख रुपये तीनों जिलों को अलग-अलग भेजे जा चुके हैं। इनके निर्माण के लिए टाटा स्टील रूरल डवलपमेंट सोसायटी सहयोग  करेगी। एक प्रसूति प्रतीक्षालय गृह निर्माण की कुल प्राक्कलित राशि 25.3 लाख रुपये है। इस संबंध में जानकारी देते हुए सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से बताया गया कि पश्चिमी सिंहभूम जिला में हम लोगों ने प्रसूति प्रतीक्षालय गृह निर्माण के लिए बंदगांव का चयन किया है। यह इलाका जिला मुख्यालय से काफी सुदूर में पड़ता है। यहां प्रतीक्षालय बन जाने से सुदूर गांव में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को आराम होगा। प्रतीक्षालय में खाने-पीने की व्यवस्था से लेकर चिकित्सा कर्मी भी उपलब्ध रहेंगे। यूनिसेफ के राजीव कुमार सिंह ने बताया कि दुर्गम क्षेत्र अक्सर ऐसा सुनने को मिलता है कि ममता वाहन नहीं मिलने के कारण महिला का घर पर ही प्रसव हो जाता है। कई बार प्रसूति और शिशु की इसमें मौत भी हो जाती है। ऐसे भी मामले सामने आये हैं जब प्रसूति का वाहन से अस्पताल आने के क्रम में रास्ते में ही प्रसव हो गया। ऐसी परिस्थिति से निजात दिलाने और संस्थागत सुरक्षित प्रसव को ध्यान में रखकर पायलट प्रोजेक्ट के तौर यह पहल की जा रही है।

Edited By: Sanam Singh