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कलाई टूटी पर नहीं टूटा हौसला; जमशेदपुर में निखरी थीं गोल्फर प्रणवी उर्स, एशियन गेम्स में दिलाया गोल्ड

Published: Sat, 03 Oct 2026 10:46 AM (IST)Updated: Sat, 03 Oct 2026 11:19 AM (IST)

प्रणवी उर्स ने 20वें एशियाई खेलों में भारत के लिए महिला गोल्फ का पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा ...और पढ़ें

प्रणवी उर्स ने एशियाई खेलों में गोल्फ का स्वर्ण जीता। जागरण

प्रणवी उर्स ने एशियाई खेलों में गोल्फ का स्वर्ण जीता। जागरण

HighLights

  1. प्रणवी उर्स ने एशियाई खेलों में गोल्फ का स्वर्ण जीता।

  2. कलाई की गंभीर चोट से उबरकर हासिल की यह सफलता।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। जब सपने बड़े हों, तो रास्तों के पत्थर भी आपके जज्बे के आगे नतमस्तक हो जाते हैं। जापान के आईची-नागोया में चल रहे 20वें एशियाई खेलों में भारतीय महिला गोल्फ का पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाली प्रणवी उर्स की सफलता केवल एक पदक की जीत नहीं, बल्कि यह जीत थी एक बेटी के अटूट हौसले की, एक परिवार के अनगिनत त्याग की और हार न मानने की उस जिद की, जिसने किस्मत का लिखा भी बदल दिया।

कलाई की गंभीर चोट के कारण करियर पर लगे ग्रहण से उबरकर महाद्वीपीय चैंपियन बनने के इस प्रेरणादायी सफर का एक अहम पड़ाव लौहनगरी जमशेदपुर की फेयरवे भी रही है।

कौन हैं प्रणवी उर्स?

महज 23 साल की उम्र में प्रणवी उर्स ने गोल्फ की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। एशियाई खेलों में पदक जीतना उनके करियर की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। 15 अप्रैल 2003 को कर्नाटक के मैसूर में जन्मीं प्रणवी ने महज छह साल की उम्र में गोल्फ खेलना शुरू किया था। उन्हें इस खेल से जोड़ने की प्रेरणा अपने पिता और भाई से मिली।

जूनियर और एमेच्योर गोल्फ सर्किट में प्रणवी ने कम उम्र में ही कई खिताब अपने नाम किए। इनमें थाईलैंड में आयोजित 2018 सिंघा वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप और ऑल इंडिया जूनियर गर्ल्स चैंपियनशिप की जीत प्रमुख है। इसके बाद वर्ष 2020 में उन्होंने पेशेवर गोल्फ में कदम रखा।

शाही शहर मैसूरु की रहने वाली हैं प्रणवी

कर्नाटक के ऐतिहासिक शहर मैसूरु की रहने वाली 23 वर्षीय प्रणवी का जन्म एक खेल प्रेमी परिवार में हुआ। उनके पिता शरद उर्स और मां त्रिशा उर्स ने बचपन में ही बेटी के भीतर छिपे हुनर को भांप लिया था।

महज सात साल की उम्र में मैसूरु के जयचामराजा वाडियार गोल्फ क्लब से उन्होंने गोल्फ की शुरुआत की। इस महंगे खेल में आने वाली तमाम आर्थिक और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद माता-पिता ने अपनी जरूरतों में कटौती कर बेटी के सपनों को कभी रुकने नहीं दिया।

कलाई टूटी पर नहीं टूटने दिया हौसला

प्रणवी का खेल सफर बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा। जब उनका पेशेवर करियर तेजी पकड़ रहा था, तभी कलाई में गंभीर फ्रैक्चर ने सब कुछ रोक दिया। कई महीनों तक गोल्फ क्लब पकड़ना भी दूभर हो गया था और भविष्य पर संशय के बादल मंडराने लगे थे।

असहनीय दर्द और लंबे पुनर्वास के दौर में माता-पिता का संबल उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। मानसिक फौलाद बनकर लौटीं प्रणवी ने वापसी के बाद राष्ट्रीय महिला प्रो टूर पर एक ही सत्र में पांच खिताब जीतकर इतिहास रच दिया।

संघर्ष के दौर में जमशेदपुर ने संवारा था खेल

चोट से उबरने के बाद अपने खेल की लय हासिल करने के लिए प्रणवी वर्ष 2021-22 में राष्ट्रीय महिला टूर के सिलसिले में जमशेदपुर आई थीं। उन्होंने यहां टाटा स्टील द्वारा संचालित बेल्डीह और गोलमुरी गोल्फ कोर्स पर कड़ा अभ्यास और मुकाबला किया था।

प्रणवी को 2023 में भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, और उन्हें जनवरी 2022 में ओलंपिक की तैयारी के लिए खास मदद देने के मकसद से 'टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम' (TOPS) के कोर ग्रुप में भी शामिल किया गया था. 

स्थानीय वरिष्ठ गोल्फर संजय पचौरी याद करते हैं कि चोट से उबरने के बाद जमशेदपुर में खेलते समय उनका असाधारण समर्पण और शांत स्वभाव देखने लायक था। शनिवार को जब उन्होंने एशियाई खेलों में 15 अंडर पार का ऐतिहासिक स्कोर बनाकर देश को पहला गोल्फ स्वर्ण दिलाया, तो जमशेदपुर की गोल्फ बिरादरी ने भी अपनी इस संघर्षशील खिलाड़ी की सफलता पर गर्व जताया। 

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