JFA का चुनाव: फुटबाल संघ में कुर्सी बेगम को, खजाना रिश्तेदार को, प्रदीप वर्मा बने अध्यक्ष, रब्बानी का तिलिस्म रहा बरकरार
झारखंड फुटबॉल संघ की वार्षिक आम सभा में प्रदीप वर्मा अध्यक्ष चुने गए। गुलाम रब्बानी ने अपनी पत्नी और साले ...और पढ़ें

राजनीतिक गलियारों की तर्ज पर झारखंड फुटबाॅल एसोसिएशन में भी पारिवारिक प्रभुत्व की मिसाल देखने को मिली।
HighLights
गुलाम रब्बानी ने परिवार को संघ के प्रमुख पद दिए।
जमशेदपुर की एजीएम में अनुपस्थिति पर सवाल उठे।
जासं, जमशेदपुर। झारखंड फुटबॉल संघ (JFA) की वार्षिक आम सभा (AGM) रविवार को गिरिडीह में संपन्न हो गई। इस बैठक में संघ की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया।
जिसमें गुमला से भाजपा नेता प्रदीप वर्मा को झारखंड फुटबॉल संघ का नया अध्यक्ष चुना गया है। हालांकि, संघ के प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण को लेकर खेल गलियारों में खासी चर्चाएं गर्म हैं।
राबड़ी मॉडल की तर्ज पर परिवार को कमान
राजनीतिक गलियारों की तर्ज पर जेएफए में भी पारिवारिक प्रभुत्व की मिसाल देखने को मिली। राज्य गठन के 26 वर्षों से जेएफए की कमान गुलाम रब्बानी संभालते आ रहे हैं।
उन्होंने इस बार प्रत्यक्ष रूप से पद संभालने के बजाय अपनी पत्नी शबाना रब्बानी को संघ का नया महासचिव और अपने साले के बेटे आफताब अहमद को कोषाध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज कराया है।
खेल प्रेमियों का मानना है कि संघ पर अपने परिवार का एकाधिकार बनाए रखने के लिए यह रणनीति अपनाई गई है, जबकि सियासी और प्रशासनिक संतुलन साधने के लिए प्रदीप वर्मा को अध्यक्ष बनाया गया है।
जमशेदपुर की बेरुखी और नई कार्यकारिणी
झारखंड में फुटबॉल की नर्सरी और टाटा फुटबॉल अकादमी का गौरव समेटने वाले जमशेदपुर शहर की इस एजीएम से दूरी साफ तौर पर नजर आई।
लौहनगरी से कोई भी प्रमुख प्रतिनिधि गिरिडीह के इस दरबार में शामिल होने नहीं पहुंचा। हालांकि, कॉरपोरेट संतुलन और औपचारिकता को ध्यान में रखते हुए टाटा स्टील खेल विभाग के प्रमुख मुकुल विनायक चौधरी को संघ का उपाध्यक्ष बनाया गया है।
उनके साथ सरायकेला-खरसावां के अजहर अहमद और नुपूर को भी उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा कार्यकारिणी में कई नए चेहरों को जगह मिली है।
संयुक्त सचिव पद की जिम्मेदारी पूर्व महिला फुटबालर आशा और मंसूर आलम को दी गई है। वहीं, कार्यकारिणी सदस्यों में बोकारो के सुभाष रजक, नवनीत ओझा और लोहरदगा के अंतरराष्ट्रीय रेफरी साजिद अहमद को शामिल किया गया है।
झारखंड बने ढाई दशक से अधिक का समय बीत चुका है, कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन जेएफए में गुलाम रब्बानी का यह तिलिस्म आज भी पूरी तरह अभेद्य बना हुआ है।