जमशेदपुर, अमित तिवारी।  हे राम! हिमालय से निकलकर उत्तरी भारत के गंगा मैदान में बहने वाली सरयू नदी उल्टा बह रही है। झारखंड विधानसभा चुनाव में पूर्वी व पश्चिमी विधानसभा सीट पर सरयू की तेज धार से अबतक कार्यकर्ता उबर नहीं पाए हैं। रोज मारपीट की घटनाओं से लेकर गाली-गलौज और आपसी गुटबाजी के मामले सामने आ रहे हैं। पुलिस थाना से लेकर पार्टी के आलाकमान तक यह सूचना पहुंच रही है।

बीते रविवार को भी इसका साफ असर दिखा, जब भाजपा के पिकनिक समारोह में दो गुट आपस में ही उलझ गए। यह चर्चा आम हो चुकी है। खासकर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इधर, निर्दलीय प्रत्याशी सरयू राय ने पूर्वी-पश्चिमी विधानसभा में अपनी पकड़ मजबूत करने को लेकर भारतीय जन मोर्चा (बीजेएम) संगठन का भी बना लिया है। इससे शहर का राजनीति माहौल गर्म हो गया है। झारखंड चुनाव के बाद फिर सोशल मीडिया राजनीतिक रंगों में डूबते दिख रहा है। पार्टी के बड़े नेता तो खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं, लेकिन वह अपने समर्थकों से फेसबुक, वाट्स-एप सहित अन्य माध्यमों से अपनी-अपनी बातों को रखने से नहीं चूक रहे हैैं।

ऐसी भी क्या पिकनिक जो पूर्वी-पश्चिमी में बांट दे

भाजपा नेत्री प्रीति सिन्हा अपने फेसबुक वाल पर पोस्ट की हैं- ऐसी भी क्या पिकनिक जो पूर्वी-पश्चिमी में बांट दे। इसपर करीब 50 से अधिक लोगों ने कॉमेंट किया है, वहीं दो सौ से अधिक लाइक। आदर्श मेहंदी लिखते हैं कि दुर्भाग्य की बात है कि इतनी मजबूत पार्टी आज टूटने के कगार पर है। आखिर ऐसा क्या हो गया? पार्टी के श्रीराम आपके पास अब भी समय है। पूरे पार्टी को एक व्यक्ति ने डूबा दिया।

सॉरी, हाथी उड़ रहा है

रविंद्र सिंह लिखते हैैं- सॉरी, हाथी उड़ रहा है। विनय तिवारी ने फेसबुक के माध्यम से पार्टी के बंटाधार का कारण समझाने का प्रयास किया है। वहीं, मनोज सिंह लिखते हैं- अभी संगठन में सुधार की आवश्कता है। अब देर हुई तो मुश्किल होगा। क्योंकि, भाजपा में गरही पैठ रखने वाले व संघ से जुड़े सरयू राय ने खुद संगठन बना लिया है। जिसका विस्तार अगले तीन माह में तेजी से होने वाला है। भाजपा अगर अपने कार्यकर्ताओं को आपस में जोड़कर नहीं रखी तो बड़ी संख्या में टूटकर कार्यकत्र्ता बीजेएम से जुड़ेंगे। जिससे आने वाले समय में पार्टी को भारी नुकसान हो सकता है। अभिषेक पांडे पार्टी के आला नेताओं को सूझबूझ के साथ आगे बढऩे की नसीहत देते हैं। वह कहते हैैं- बिना कार्यकत्र्ता की मदद से कोई भी रण जीतना संभव नहीं है। इसके बावजूद पार्टी ध्यान नहीं दे रही है।

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