यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 03, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
नक्सलियों के शिकार बने सांसद सुनील महतो की पत्नी का छलका दर्द, कही ये बातें
झामुमो सांसद सुनील महतो की हत्या के 12 साल पूरे हो गए। जांच का कोई सकारात्मक नतीजा सामने नहीं आया ...और पढ़ें

जमशेदपुर, जागरण संवाददाता। झामुमो सांसद सुनील महतो की चार मार्च 2007 को घाटशिला अनुमंडल के बाघुड़िया फुटबॉल मैदान में नक्सलियों ने भीड़ के सामने गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने मामले की तफ्तीश शुरू की। बाद में सीबीआइ को जांच सौंप दी गई। हत्या के 12 साल पूरे हो गए। जांच का कोई सकारात्मक नतीजा सामने नहीं आया है। सुनील महतो की पत्नी पूर्व सांसद सुमन महतो का दर्द अब भी छलक रहा है।
उन्होंने कहा, प्रदेश की राजनीति में पति तेजी से उभर रहे थे, इसी बीच नक्सलियों ने हत्या कर दी। तेजी से उभरना भी कभी-कभी घातक हो जाता है, जैसा कि पति के साथ हुआ। हत्या से किसे क्या लाभ हुआ। जनता के बीच सच्चाई सामने आनी चाहिए। यह बात मैं शुरू से कहती आ रही हूं। हत्या राजनीतिक साजिश हो सकती है। केंद्रीय एजेंसी से जांच पर आस जगी थी कि हत्या के पीछे कौन साजिशकर्ता इसका खुलासा होगा। आखिर कौन सी जांच हो रही है, जो अब तक पूरी नहीं हो रही हैं। न्याय की अब कोई उम्मीद भी नहीं है। आस भी रखना बेकार है। जब जनप्रतिनिधि के साथ ऐसा हो सकता हैं तो आम लोगों के मामले में क्या होता होगा, अंदाजा लगाया जा सकता हैं। बच्चे भी पूछते हैं कि पिता को क्यों मारा गया।

एनआइए जांच के लिए किया था पत्राचार
पूर्व सांसद ने कहा कि मुख्यमंत्री से लेकर दिल्ली तक पति की हत्या की जांच एनआइए कराने को पत्रचार किया। जांच की अनुशंसा भी प्रदेश के मुख्य सचिव की ओर से की गई, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ पाया। कहा कि रांची तमाड़ के विधायक रमेश सिंह मुंडा की हत्या 2008 में नक्सलियों ने कर दी थी। एनआइए ने तफ्तीश कर मामले का खुलासा कर दिया। हत्या में नक्सली और राजनीतिक गठजोड़ सामने आया था। अब खुलासा की उम्मीद कम होती जा रही है।
हत्या में राहुल दस्ते की संलिप्तता सामने आई
सुनील महतो की हत्या में नक्सली राहुल दस्ते की संलिप्तता पुलिस और सीबीआइ जांच में सामने आई थी। राहुल पर सीबीआइ ने दस लाख का इनाम रखा था। उसने अपनी पत्नी झरना के साथ 25 जनवरी 2017 को बंगाल पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। बंगाल की सरेंडर पॉलिसी के अनुसार समर्पण करने वाले नक्सलियों को न्यायिक हिरासत में नहीं भेजा जाता हैं। ऐसा ही राहुल और उसकी पत्नी के साथ हुआ। दोनों को सीबीआइ रिमांड पर नहीं ले पाई। हत्या में नक्सली राजेश मुंडा को पुलिस ने अपनी तफ्तीश के दौरान बंगाल के पश्चिमी मिदनापुर सालबनी से 2009 में गिरफ्तार किया था। नक्सली असीम मंडल उर्फ आकाश,रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन, जयंती, झरना, विकास, बेला समेत अन्य का नाम सामने आया था। झरना और रंजीत को छोड़ सभी फरार हैं।