कुमारडुंगी (पश्चिमी सिंहभूम),मनीष दास। उन साढे छह हजार बच्चों का क्या कसूर है जिनका पिछले एक वर्ष से पौष्टिक आहार बंद कर दिया गया है। अब उन्हें आंगनबाड़ी केंद्र से ना तो दाल-चावल मिलता है और ना ही गुड़- बादाम के दाने मिलते हैं। ऐसे में कुपोषण कैसे मिटेगा। सूखा भोजन खाने के कारण बच्चों का वजन धीरे-धीरे घट रहा है।

पिछले एक वर्ष से बच्चों के थाली से पौष्टिक आहार मानो कहीं गायब सा हो गया है। बच्चे सुखा भात खाकर दिन गुजार रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्र से पौष्टिक आहार नहीं मिलने के कारण बच्चे कमजोर होते जा रहे हैं वहीं सेविकाएं मालामाल हो रही हैं। पश्चिम सिंहभूम जिले के कुमारडुंगी प्रखंड क्षेत्र में कुल 86 आंगनबाड़ी केंद्र है। इनमें लगभग साड़े 6 हजार बच्चों का पंजीकरण किया गया है। लाॅकडाउन के बाद से सभी आंगनबाड़ी सेविकाओं को बच्चों का पोषाहार उनके घर घर पहुंचाने का निर्देश दिया गया था। पर ज्यादातर आंगनबाड़ी सेविकाएं बच्चों तक पोषाहार पहुंचाने की बजाय अपनी रसोई का मिठास बढ़ाने में लगी हुइ हैं। आज जब बच्चों के थाली में से पोषाहार गायब है तब आंगनबाड़ी सेविकाएं स्वादिष्ट भोजन कर रही हैं। बच्चों को मिलने वाला दाल, चावल, चीनी, सरसों तेल, सूजी, आलू व अन्य पौष्टिक आहार का एक नया दाना बच्चों तक नहीं पहुंच रहा है। सभी सामान गायब हो रहे हैं।

इनकी सुनें

छोटारायकमन गांव निवासी चंपा देवी बताते हैं कि उनके तीन बच्चे हैं। बड़ी बेटी की 6 वर्ष उम्र हो गई है।  छोटी बेटी की तीन वर्ष हो रही है। उसे अबतक में आंगनबाड़ी केंद्र से मात्र एक बार ही राशन दिया गया है। जबकि डेढ़ वर्ष की बेटी को पिछले 1 साल से एक बार भी पौष्टिक आहार नहीं मिला है। महंगाई बढने के कारण पिछले एक वर्ष से घर में पौष्टिक आहार नहीं बन रहा है। बच्चे इस कारण से बहुत कम भोजन करते हैं। उनका शरीर धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। 

रेवती का है ये कहना

छोटारायकमन गांव की ही रेवती गोप ने भी बताया कि उनके दो बच्चे हैं। दोनों का नाम आंगनबाड़ी केंद्र में पंजीकृत किया गया है। परंतु उन्हें पिछले 1 साल से एक बार भी आंगनबाड़ी केंद्र की तरफ से अनाज नहीं दिया गया है। लॉकडाउन में महंगाई बढ़ने के कारण रसोई का स्वाद बदल गया है। बच्चे घर में सूखा भात खाते हैं। जब आंगनबाड़ी केंद्र से पौष्टिक आहार मिलता था तो बच्चे अधिक भोजन करते थे। अब नहीं करते है।