जमशेदपुर (जागरण संवाददाता)।  सीखने व सिखाने के उद्देश्य से गांवों में जाना चाहिए क्योंकि कुछ मामलों में वो  हमसे अधिक अनुभवी हैं, वहीं कुछ में हम बेहतर हैं। परस्पर सीखने-सिखाने के भाव से ही गांवों का विकास संभव है। 

यह कहना था ग्रामीण विकास मामलों के विशेषज्ञ और पिछले 20 साल से एकल अभियान से जुडे केइएन राघवन का। वे उन्नत भारत अभियान के तहत राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जमशेदपुर में ग्रामीण सशक्तीकरण (रुरल इंपावरमेंट) विषय पर व्याख्यान दे रहे थे। इस दौरान केईएन राघवन ने उन्नत भारत अभियान से जुड़े सभी प्राध्यापकों व छात्रों को संबोधित करते भारत की शिक्षा पद्धति व विदेश की शिक्षा पद्धति के अंतर को समझाया।

उन्होंने कहा कि भारतीय पद्धति जो रही है उसमें शिक्षा हस्तातंरित होती थी और गुरु  की इच्छा पर निर्भर करती थी। दूसरी ओर विदेशी पद्धति में शिक्षा बेची जाती है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत के गांव प्रारम्भ से ही उत्पादन करने वाले रहे हैं। उन्होंने गांवो को पुन: उत्पादक बनाने का मूल मंत्र पर प्रकाश डालते हुए प्राकृतिक रूप से मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ाने के लिए जीवामृत बनाने, बायो गैस व कीटनाशक बनाने की विधि बताई जिससे की मिट्टी सदैव स्वस्थ बनी रहे तथा अच्छा उत्पादन दे सके। इस व्याख्यान में संस्था के प्रभारी निदेशक डॉ.राम विनय शर्मा, डॉ. रणजीत प्रसाद, क्षेत्रीय संयोजक, डॉ विनय कुमार, संयोजक, उन्नत भारत अभियान व अन्य  प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक तथा छात्र उपस्थित थे।

 

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