Navaratri 2026: हाथी पर माता का आगमन लाएगा सुख-समृद्धि और वर्षा, जानिए प्रस्थान के वाहन का धार्मिक संकेत
शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर, 2026 से शुरू होकर 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ समाप्त होगा। इस वर्ष मां दुर्गा ...और पढ़ें

19 अक्टूबर को महानवमी का पर्व मनाया जाएगा, जबकि 20 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) मनाई जाएगी।
HighLights
नवरात्र 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक, घटस्थापना शुभ मुहूर्त।
मां दुर्गा का आगमन हाथी पर, प्रस्थान घोड़े पर होगा।
हाथी सुख-समृद्धि का प्रतीक, घोड़ा अस्थिरता का संकेत।
जासं, जमशेदपुर। शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र इस वर्ष 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू होने जा रहा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस आस्था और भक्ति के पावन पर्व में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की जाएगी।
19 अक्टूबर को महानवमी का पर्व मनाया जाएगा, जबकि 20 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) मनाई जाएगी। विजयादशमी के दिन ही श्रद्धालु मां दुर्गा की प्रतिमाओं का गाजे-बाजे के साथ विसर्जन कर उन्हें विदाई देंगे।
नवरात्र को लेकर जमशेदपुर समेत देशभर के पूजा पंडालों और मंदिरों में तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं।
सवारी का विशेष धार्मिक महत्व
सनातन धर्म और पौराणिक मान्यताओं में नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के आगमन (आने) और गमन (प्रस्थान) की सवारी यानी वाहन का विशेष ज्योतिषीय एवं धार्मिक महत्व माना गया है।
शास्त्रों के अनुसार, नवरात्र के प्रारंभ और समापन के दिन (वार) के आधार पर मां जगदम्बा की सवारी तय होती है।
वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्र की शुरुआत रविवार (11 अक्टूबर) से हो रही है, जबकि विजयादशमी मंगलवार (20 अक्टूबर) को पड़ रही है। इस पंचांगीय योग के कारण इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन वाहन 'हाथी' (गज) और प्रस्थान वाहन 'घोड़ा' (अश्व) होगा।
दिनों के आधार पर तय होते हैं माता के वाहन
- आगमन वाहन: यदि नवरात्र का आरंभ रविवार या सोमवार को हो, तो माता हाथी पर आती हैं। शनिवार या मंगलवार को शुरू होने पर घोड़ा, गुरुवार या शुक्रवार को डोली (पालकी) और बुधवार को शुरुआत होने पर नाव (नौका) माता की सवारी बनती है।
- गमन वाहन: इसी प्रकार, यदि विजयादशमी शनिवार या मंगलवार को हो, तो देवी का गमन घोड़े (अस्त्र-शस्त्र युक्त सवारी) पर माना जाता है।
आगमन व गमन के वाहनों का ज्योतिषीय व सामाजिक संकेत
हाथी पर आगमन (अत्यंत शुभ संकेत):
शास्त्रों में देवी दुर्गा का हाथी पर सवार होकर आना अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना गया है। हाथी सुख, समृद्धि, शांति और उत्तम वर्षा का प्रतीक है।
धार्मिक मान्यता है कि जब माता गज पर सवार होकर आती हैं, तो देश में अच्छी मानसूनी व मौसमी बारिश होती है। इससे कृषि पैदावार में बढ़ोतरी होती है, अकाल दूर होता है तथा समाज में धन-धान्य और खुशहाली की वृद्धि होती है।
घोड़े पर प्रस्थान (सजगता और सतर्कता का संकेत)
विजयादशमी के दिन माता का घोड़े पर प्रस्थान करना धार्मिक व ज्योतिषीय दृष्टिकोण से उथल-पुथल, अशांति और बेचैनी से जोड़कर देखा जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, घोड़े पर गमन सामाजिक, राजनीतिक और मानसिक अस्थिरता का संकेत देता है। इसके प्रभाव से जनमानस में तनाव, प्राकृतिक आपदाओं या सीमाओं पर हलचल की संभावना व्यक्त की जाती है।
ऐसे समय में समाज में आपसी सद्भाव और धैर्य बनाए रखने की सलाह दी जाती है। सनातन परंपरा में नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के आगमन (आने) और गमन (प्रस्थान) के वाहन का विशेष ज्योतिषीय एवं सामाजिक महत्व माना गया है।
घटस्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त
धर्मशास्त्रों के अनुसार नवरात्र के पहले दिन प्रतिपदा तिथि को शुभ मुहूर्त में घटस्थापना की जाती है:
- शुभ मुहूर्त (प्रातः काल): 11 अक्टूबर को सुबह 06:21 बजे से सुबह 10:11 बजे तक (घटस्थापना का सबसे उत्तम समय)।
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक।
नवरात्र 2026: तिथिवार देवी पूजन कैलेंडर
- 11 अक्टूबर (रविवार): प्रतिपदा - घटस्थापना व मां शैलपुत्री पूजा
- 12 अक्टूबर (सोमवार): द्वितीया - मां ब्रह्मचारिणी पूजा
- 13 अक्टूबर (मंगलवार): तृतीया - मां चंद्रघंटा पूजा
- 14 अक्टूबर (बुधवार): चतुर्थी - मां कुष्मांडा पूजा
- 15 अक्टूबर (गुरुवार): पंचमी - मां स्कंदमाता पूजा
- 16 अक्टूबर (शुक्रवार): षष्ठी - मां कात्यायनी पूजा (बेल न्योता)
- 17 अक्टूबर (शनिवार): सप्तमी - मां कालरात्रि पूजा (महापूजन प्रारंभ)
- 18 अक्टूबर (रविवार): अष्टमी - मां महागौरी पूजा (दुर्गा महाअष्टमी व कन्या पूजन)
- 19 अक्टूबर (सोमवार): नवमी - मां सिद्धिदात्री पूजा (महानवमी व हवन)
- 20 अक्टूबर (मंगलवार): दशमी - विजयादशमी (शमी पूजन, अपराजिता पूजा व प्रतिमा विसर्जन)
