जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चार माह में 160 बच्चों की मौत होने के बाद शनिवार को हड़कंप मचा रहा। सुबह-सुबह अधीक्षक व उपाधीक्षक ने शिशु रोग विभाग का निरीक्षण किया और बच्चों की हो रही मौत का कारण जाना।

एनआइसीयू (नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) में देखा कि एक-एक वार्मर पर चार-चार बच्चे भर्ती हैं। इसका कारण पूछा तो नर्सो ने बताया कि मरीजों की संख्या अधिक और सुविधाएं कम है, इसलिए ऐसा करना मजबूरी है। नहीं करने से इससे भी अधिक नवजात बच्चों की मौत हो सकती है। इसके बाद अधीक्षक ने शिशु रोग विभागाध्यक्ष से रिपोर्ट तलब की है। जिससे इसपर रोकथाम के लिए हर संभव कोशिश किया जा सके। अधीक्षक डॉ. एसएन झा ने बताया कि बच्चों की मौत होना चिंता का विषय है। इसका कारण ढूंढने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले जच्चा-बच्चा कई तरह के रोगों से ग्रस्त होते हैं। इसमें एनीमिया, कुपोषण, गर्भावस्था के दौरान सही देखरेख नहीं होने कारण उसका असर नवजात बच्चों पर पड़ता है और उससे उसकी मौत होने की आशंका बढ़ जाती है। दूसरी ओर, एमजीएम अस्पताल में चिकित्सक व कर्मचारियों की भी भारी कमी है।

बीते वर्ष भी चार माह में 164 नवजात बच्चों की मौत हो गई थी जिसका खुलासा 'दैनिक जागरण' ने किया था। उसके बाद केंद्र व राज्य सरकार ने हरकत में आई थी। वहीं हाई कोर्ट ने भी संज्ञान में लेते हुए सरकार से जवाब तलब किया था।

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165 के बजाए मात्र 45 डॉक्टर, नर्सो की संख्या भी आधी

एमजीएम अस्पताल में चिकित्सकों के साथ-साथ नर्स, टेक्नीशियन सहित अन्य पद भी आधे से अधिक रिक्त हैं। इससे मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। एनआइसीयू में 24 घंटे एक डॉक्टर की तैनाती होनी चाहिए जो नहीं रहती है। रात के समय सीनियर नर्स भी नहीं रहती हैं। 165 के बजाए सिर्फ 45 चिकित्सक ही तैनात है।

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एमजीएम का हाल

पद स्वीकृत उपलब्धता

चिकित्सक 165 45

जू चिकित्सक 92 50

नर्स 275 51

टेक्नीशियन 25 13

ड्रेसर 10 01

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Posted By: Jagran

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