जमशेदपुर : टाटा समूह की मेटल्‍स से जुड़ी सभी कंपनियों का विलय टाटा स्‍टील में होने जा रहा है। इसका मतलब है कि मेटल्स से जुड़ी सभी कंपनियों का कारोबार की एक कंपनी टाटा स्टील हो जाएगी। इस बाबत टाटा स्‍टील ने स्‍टॉक एक्‍सचेंज को बताया है कि गुरुवार को कंपनी के बोर्ड आफ डायरेक्‍टर्स की बैठक में इस प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई।

इन कंपनियों का होगा विलय

देश की सबसे पुरानी स्टील कंपनी टाटा स्‍टील ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी के मुताबिक ग्रुप की जिन कंपनियों का टाटा स्‍टील में विलय होगा, उनमें टाटा स्‍टील लॉन्‍ग प्रोडक्‍ट्स , द टिनप्‍लेट कंपनी आफ लिमिटेड , टाटा मेटालिक्‍स लिमिटेड, टीआरएफ लिमिटेड, इंडियन स्‍टील एंड वायर प्रोडक्‍ट्स लिमिटेड, टाटा स्‍टील माइनिंग लिमिटेड और एसएंडटी माइनिंग कंपनी लिमिटेड शामिल हैं।

टाटा ग्रुप ने सेबी को दी जानकारी

टाटा स्टील के बोर्ड ने कंपनी की एक्सचेंज फाइलिंग में कहा है कि मेटल्स कंपनियों के बीच सामंजस्य स्थापित करने के लिए ऐसा करना जरूरी था। विलय का निर्णय लेने से पहले इसकी समीक्षा की गई। स्वतंत्र निदेशकों की समिति और आडिट कमेटी द्वारा सिफारिश की गई। टाटा स्टील ने कहा है कि विलय की गई कंपनियों के शेयरधारकों को उनकी कंपनियों के मूल्य के आधार पर टाटा स्टील का शेयर दिया जाएगा। सात कंपनियों के लिए शेयर विनिमय अनुपात अलग-अलग तय किया गया है।

प्रस्तावित विलय टाटा समूह की संरचना को और सरल बनाने के लिए गया है। 2019 के बाद से टाटा स्टील ने 116 सहायक कंपनियों को कम कर दिया है। इसमें 72 सहायक कंपनियों का अस्तित्व समाप्त हो गया है। वहीं 24 कंपनियों में से 20 एसोसिएट्स और जेवी को समाप्त कर दिया गया है। विलय की इस प्रक्रिया का प्रस्ताव अब रेगुलेटरी एजेंसी के पास जाएगी, जिसमें स्टाक एक्सचेंज व एनसीएलटी शामिल है।

विलय के पीछे यह है तर्क

टाटा समूह ने विलय के पीछे यह तर्क दिया है कि इससे लक्ष्य आधारित विकास को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही बेहतर परिचालन क्षमता से अच्छे परिणाम मिलेंगे। इन कंपनियों के बीच व्यापार बढ़ाने में सुविधा मिलेगी। टाटा समूह पांच एस रणनीति के अनुरूप सरलीकरण, तालमेल, पैमाने, स्थिरता और गति ( simplification, synergy, scale, sustainability, and speed) विलय करेगा, ताकि ई कंपनियों को समाप्त करके समूह की टाटा समूह की संरचना सरल हो सके।

इससे सामान्य सुविधाओं के बेहतर उपयोग हो सकेगा। साथ ही बेस्ट प्रैक्टिसेस को साझा करने, दोहराव को समाप्त करने और अनुपालन आवश्यकता की बहुलता और अन्य चीजों के साथ प्रशासनिक खर्चों को कम करने में मदद मिलेगी।

वन टाटा स्टील का लक्ष्य होगा पूरा

आइएसडब्ल्यूपी (तार कंपनी) पर टाटा स्टील ने कहा कि विलय के बाद ग्राहकों के सामने 'वन-टाटा स्टील' का उत्पाद होगा। मेगा-मर्जर योजना के लिए सभी सात कंपनियों के साथ-साथ टाटा स्टील, नियामक निकायों और स्टॉक एक्सचेंजों के शेयरधारकों की मंजूरी की आवश्यकता होगी। टाटा स्टील ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में विलय को लेकर इशारा कर दिया था। विलय के बाद टाटा स्टील को मिलने वाले फायदों में से एक यह है कि रॉयल्टी की आवश्यकता नहीं होगी।

टाटा समूह ने कई कंपनियों को किया है विलय

इस साल की शुरुआत में, समूह ने टाटा कंज्यूमर और टाटा कॉफी के विलय की घोषणा की थी। इस सप्ताह की मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि टाटा अब 2024 तक एयर इंडिया ब्रांड के तहत एयरलाइन कंपनियों - एयर एशिया इंडिया और विस्तारा को भी विलय की योजना बना रही है।

विलय होने वाली कंपनियों के शेयर गिरे

विलय की घोषणा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, टाटा स्टील के शेयर में लगभग 4.1 प्रतिशत की तेजी आई, जबकि सेंसेक्स में सुबह-सुबह 650 अंक से अधिक की गिरावट आई। टीएसपीएल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ और शेयरधारक मूल्य के 9 प्रतिशत से अधिक गिर गया। टीआरएफ और टिनप्लेट दोनों पांच प्रतिशत से कम पर कारोबार कर रहे थे। टाटा मेटालिक्स तीन फीसदी की गिरावट के साथ 776 रुपये पर बंद हुआ।

विलय के बाद शेयरधारकों को इतना मिलेगा शेयर

स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं की रिपोर्ट के आधार पर, बोर्ड ने निम्नलिखित चार कंपनियों के लिए प्रस्तावित विलय के बाद शेयर अनुपात यह रखा है।

  • टाटा स्टील लॉन्ग प्रोडक्ट्स के प्रत्येक 10 शेयरों के लिए, टाटा स्टील के 67 शेयर
  • टिनप्लेट कंपनी के प्रत्येक 10 शेयरों के लिए, टाटा स्टील के 33 शेयरों के लिए
  • टाटा मेटालिक्स के प्रत्येक 10 शेयरों के लिए टाटा स्टील के 79 शेयर
  • टीआरएफ के प्रत्येक 10 शेयरों के लिए टाटा स्टील के 17 शेयरों के लिए

Edited By: Jitendra Singh