जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने कहा कि महागठबंधन के भारत बंद की सफलता से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं भाजपा को देश की जनता का जवाब मिल गया है। भारत बंद को 22 पार्टियों का समर्थन मिलना विपक्षी एकजुटता को बल देता है। आने वाले चुनावों में यह एकजुटता और मजबूत होगी। बंद के जो मुद्दे थे, जो सवाल काग्रेस पार्टी ने उठाए थे, उनका जवाब अब तक प्रधानमंत्री ने नहीं दिया और न ही भाजपा ने दिया। बल्कि बंद की सफलता और विफलता पर थोथी दलील देते रहे। यह दुर्भाग्य की बात है। सरकार विदेश में बेच रही 34 रुपये लीटर पेट्रोल

डॉ. अजय कुमार मंगलवार को तिलक पुस्तकालय में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज मोदी सरकार इंग्लैंड को, मलेशिया को, इजरायल को 34 रुपये प्रति लीटर पर पेट्रोल बेच रही है और हिंदुस्तान की जनता को 82 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल खरीदना पड़ रहा है। देश की जनता प्रधानमंत्री से यह जानना चाहती है कि 11 लाख करोड़ रुपये देश की भोली-भाली जनता की जेब से जो पेट्रोल-डीजल के टैक्स के रूप में वसूला गया है, वह पैसा कहा है? मई 2014 से आज तक मोदी सरकार ने केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी में 12 बार बढ़ोत्तरी की है। पेट्रोल पर एक्साइज 211 प्रतिशत एवं डीजल पर 433 प्रतिशत कर दिया। इसके अलावा कस्टम ड्यूटी बढ़ाकर जनता पर अतिरिक्त बोझ डाला गया। कच्चे तेल की कीमतें 40 प्रतिशत कम हुई, पर पेट्रोल-डीजल में मुनाफाखोरी बढ़ी। मोदी सरकार 29 देशों को सस्ता तेल बेच रही है, पर देशवासियों के लिए कीमतें आसमान छू रही हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ती मंहगाई के खिलाफ महागठबंधन का संघर्ष जारी रहेगा।

चार माह से पोषाहार की आपूर्ति बंद

उन्होंने कहा कि प्रदेश में आंगनबाड़ी सेविकाओं को पिछले चार माह से पोषाहार की आपूर्ति बंद है। यह एक गंभीर संकट है। ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य कर रही सेविकाओं में 90 प्रतिशत से भी ज्यादा आदिवासी समुदाय से आती हैं। दुर्भाग्यवश झारखंड सरकार का ध्यान सुदूर क्षेत्रों में कार्य कर रही इन आगनबाड़ी सेविकाओं पर नहीं पड़ रहा है। कई अवसरों पर इन्हें अपने हक के लिए आदोलन एवं संघर्ष करना पड़ा है। इनका पद अस्थायी होने के कारण उन्हें किसी प्रकार का भत्ता नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा गाव में बसती है। पूर्ववर्ती सरकार ने पंचायती राज्य व्यवस्था लागू कर गाव एवं पंचायत को अधिकार दिया, लेकिन रघुवर सरकार की मंशा पंचायती राज्य व्यवस्था को कमजोर करने की है। कई अवसरों पर ऐसा देखा जा रहा है कि मुखिया एवं वार्ड प्रतिनिधियों को प्रदत्त अधिकार को सरकार कमजोर कर रही है।

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