जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : खेलों के क्षेत्र में गणितीय व सांख्यिकीय आंकड़ों का महत्व बढ़ रहा है। कई देशों में गणितीय विश्लेषण और इसके आधार पर स्ट्रेटजी बनाने में लगातार काम हो भी रहा है। यह कहना था सिमोन फ्रेजर यूनिवर्सिटी कनाडा में डिपार्टमेंट ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड एक्चुरियल साइंस के प्रोफेसर टिम स्वा‌र्ट्ज का। एक्सएलआरआइ में चल रहे इंटरनेशनल कॉन्क्लेव मैथ्स्पोर्ट एशिया में शिरकत करने पहुंचे टिम ने विशेष बातचीत में कहा कि यह आयोजन निश्चित रूप से खेलों के विश्लेषण और उस विश्लेषण के आधार पर बेहतर परिणाम हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह पूछने पर कि एशिया में खेलों के क्षेत्र में किस तरह के बदलाव की उम्मीद है, उन्होंने कहा कि केवल एशिया स्तर या बड़े खेलों की बात नहीं है। गणितीय व तकनीकी विश्लेषण आज खेलों की जरूरत है। यहां तक कि छोटे स्तर पर या स्थानीय खेलों में भी तकनीक विश्लेषण समय की मांग है। इससे रोजगार के वैकल्पिक अवसर सृजित होंगे। टिम ने कहा कि यूरोपीय देशों के विभिन्न संस्थाओं में इस तरह के कॉन्क्लेव का आयोजन नियमित रूप से किया जाता है। वे खुद बीस साल से अधिक समय से इस क्षेत्र से जुड़े हैं। क्रिकेट के बारे में अपने अनुभव के बारे में उन्होंने कहा कि यह एक जटिल खेल है। जरूरी नहीं कि हर कैलकुलेशन अगली बार भी सही बैठे। इतना जरूर है कि अधिकतम संभावनाओं को भांपा जा सकता है। वहीं वन डे व टी-20 मैचों का विश्लेषण एक ही तरीके से नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर इसके जरिए हम बदलते परिवेश में प्रतियोगिता में बने रहने और बेहतर करने की संभावनाओं पर लगातार काम कर सकते हैं। कुल मिलाकर इसके जरिए हम बदलते परिवेश में प्रतियोगिता में बने रहने और बेहतर करने की संभावनाओं पर लगातार काम कर सकते हैं।

Posted By: Jagran

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