जमशेदपुर, जागरण संवाददाता।  मानगो में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में मंगलवार को अपर जिला व सत्र न्यायाधीश सुभाष की अदालत ने अभिषेक मिश्रा और सुरेश की जमानत अर्जी खारिज कर दी। वहीं मामले के अन्य आरोपित डीएसपी अजय केरकेट्टा ने मामले में जमानत की अर्जी दाखिल की है जिस पर 29 जुलाई को सुनवाई होने की संभावना है।

गौरतलब है कि अदालत ने मामले में पटमदा के पूर्व डीएसपी रहे अजय केरकेट्टा, एमजीएम के पूर्व थाना प्रभारी इमदाद अंसारी, प्रदेश के एक मंत्री के भाई गुड्डू गुप्ता, मानगो के शंभू त्रिवेदी समेत 22 लोगों को आरोपित बनाने का आदेश दिया था। सभी के खिलाफ अदालत से समन भी भेजा गया था। इसके बाद 22 आरोपितों में मामले को लेकर खलबली मच गई है। अपने-अपने अधिवक्ता से संपर्क कर कानूनी सलाह ले रहे है। वहीं कई ने जमानत की अर्जी भी दाखिल कर दी है।

अनुसंधान पदाधिकारी की गवाही

दुष्कर्म मामले में अनुसंधान अधिकारी रहे मानगो थाना के पूर्व थाना प्रभारी अरुण कुमार महथा की मंगलवार को अपर जिला व सत्र न्यायाधीश पांच सुभाष की अदालत में गवाही पूरी हुई। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अनुसंधान अधिकारी से जिरह भी किया जिसमें अधिकारी ने अपने अनुसंधान को सही बताया। जानकारी दी कि नाबालिग की मां ने प्राथमिकी में तीन ही आरोपितों का नाम दिया था। अदालत में 164 के बयान में भी तीन ही आरोपित की जानकारी दी थी। मामले में जो 22 आरोपित बनाए गए हैं उनके संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई थी।

जनवरी 2018 को मानगो थाना में दर्ज की गई थी प्राथमिकी

मानगो के एक आवासीय परिसर में नाबालिग के साथ दुष्कर्म की घटना घटी थी। नाबालिग की मां की शिकायत पर मानगो थाना में 18 जनवरी 2018 का है। इंद्रपाल सैनी, शिव कुमार महतो और श्रीकांत महतो व अन्य के खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत मानगो थाना में दर्ज की गई थी। नामजद आरोपितों पर दुष्कर्म किए जाने, वीडियो बनाने, ब्लैक मेलिंग किए जाने, धमकाने और देह व्यापार का धंधा कराने के आरोप लगाया था। मामला अदालत में विचाराधीन है। घटना के तीन नामजद आरोपितों में एक श्रीकांत महतो को जमानत पर है। दो अन्य आरोपित शिवकुमार महतो व इंदरपाल सिंह सैनी जेल में बंद है। पुलिस ने मामले में तीन ही आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र समर्पित किया था जबकि मामले में पटमदा के तत्कालीन डीएसपी अजय केरकेट्टा और एमजीएम थाना के इंस्पेक्टर समेत कई के सामने आने पर जांच पर जांच होने लगी। अपराध अनुसंधान विभाग को बाद में मामले की जांच के आदेश दिए गए थे। अब तक जांच जारी है। मामले की जांच सीबीआई से कराने को सरकार और झारखंड उच्च न्यायालय में अर्जी दे रखा है।

Edited By: Rakesh Ranjan