जमशेदपुर [वेंकटेश्वर राव]। झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा के बेनागडिय़ा निवासी मानसिंह किस्कू ने संघर्ष से हार न मानी और आज उन्होंने संताली फिल्मों के युवा निर्देशक के रूप में अपनी पहचान बना ली है।19 साल मान सिंह के सिर से उस समय पिता का साया छिन गया, जब वे पांच साल के थे। कुछ ही दिन में मां ने भी उससे अलग दूसरी दुनिया बसा ली। मान सिंह को उसके बड़े पापा व बड़ी मम्मी ने बड़ा किया। 

इस तरह चमक गई किस्मत

करीम सिटी कॉलेज से मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई कर रहे मानसिंह ने दोस्तों व शिक्षकों के सहयोग से इस छात्र ने संथाली लघु फिल्मों के निर्देशन प्रारंभ किया तो उसकी किस्मत ही चमक गई। अब तक दो लघु फिल्म और पांच वीडियो एलबम का निर्देशन कर चुके मानसिंह का कहना है कि मैं नौकरी करना चाहता था, लेकिन ऐसा कुछ करने का एहसास हुआ ताकि समाज को जागृत किया जा सके और अपना नाम भी हो। इस कारण फिल्म निर्माण का रास्ता चुना। 

मिला बेस्ट ज्यूरी अवार्ड

गम्हरिया में आयोजित झारखंड संथाली फिल्म फेस्टिवल अवॉर्ड 2018 में गोडोम हड़ाम साइकिल को बेस्ट ज्यूरी अवॉर्ड से नवाजा गया। इसके अलावा उन्होंने मान नामक शार्ट फिल्म बनाई। इस फिल्म को भी पुरस्कार मिला है। 

Posted By: Rakesh Ranjan