चोरी न चकारी, बस दूध की मारामारी! 32 हजार की गाय ने किया निराश, थाने पहुंचा मालिक तो सोच में पड़ गई पुलिस
एक व्यक्ति ने 32 हजार रुपये में गाय खरीदी, लेकिन उम्मीद से कम दूध देने पर वह पुलिस के पास ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड इमेज।
HighLights
गाय खरीदने के बाद कम दूध मिलने पर थाने पहुंचा मालिक।
खरीदार का दावा था कि गाय रोजाना 9 से 10 लीटर दूध देगी।
विक्रेता ने खरीदार को 2 हजार रुपये लौटाने की सहमति दी।
संवाद सूत्र, खड़गपुर। आमतौर पर लोग जमीन, मकान या पैसों के लेन-देन में धोखा होने पर थाने पहुंचते हैं। लेकिन मेदिनीपुर में एक साहब गाय से मिले ‘दूध के वादे’ के पूरा न होने पर पुलिस के दरवाजे जा पहुंचे। मामला इतना अनोखा था कि पुलिस भी कुछ देर के लिए सोच में पड़ गई कि आखिर एफआईआर में धाराएं लगेंगी या दूध की बाल्टी रखी जाएगी!
मेदिनीपुर ग्रामीण के चांदड़ा इलाके के सनकाडांगा निवासी लक्ष्मण यादव ने करीब दो सप्ताह पहले 32 हजार रुपये में एक देसी गाय खरीदी थी। गाय के पूर्व मालिक चांदड़ा के ऊपरडांगा निवासी सनातन घोष थे। लक्ष्मण के मुताबिक, गाय खरीदते समय उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि वह रोजाना नौ से दस लीटर दूध देगी। लेकिन गाय लक्ष्मण के घर पहुंची और कुछ समय बाद बछड़े को जन्म दिया।
इसके बाद दूध की कहानी में वह ‘ट्विस्ट’ आया, जिसकी उम्मीद खरीदार ने शायद बिल्कुल नहीं की थी। पिछली शाम लक्ष्मण गुड़गुड़ीपाल थाने पहुंच गए। उनका आरोप था कि 32 हजार रुपये खर्च करने के बाद भी गाय पूर्व मालिक के बताए मुताबिक दूध नहीं दे रही है। यानी मामला साफ था गाय आई 32 हजार की, लेकिन दूध निकला उम्मीद से काफी कम! अनोखी शिकायत सुनकर पुलिस भी कुछ देर के लिए असमंजस में पड़ गई।
मामला ऐसा था कि न इसे सीधे चोरी कहा जा सकता था, न मारपीट और न ही जमीन-जायदाद का विवाद। आखिर पुलिस ने दोनों पक्षों को बैठाकर बातचीत से मामला सुलझाने की सलाह दी। गाय बेचने वाले सनातन घोष भी बातचीत के लिए तैयार हो गए।
हालांकि उनका कहना था कि उन्होंने गाय के रोजाना नौ-दस लीटर दूध देने की कोई गारंटी नहीं दी थी। उधर लक्ष्मण का तर्क था कि अगर गाय इतना दूध नहीं देती, तो फिर उसकी कीमत 32 हजार रुपये कैसे हो सकती है?
मामला बातचीत तक पहुंचा और आखिरकार दोनों पक्षों में समझौता हो गया। लक्ष्मण के मुताबिक, करीब दो हजार रुपये लौटाने की बात हुई। इस पूरे घटनाक्रम पर लक्ष्मण ने कहा, मामला सुलझ गया। गाय की ओर से हालांकि इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। वह शायद यही सोच रही होगी कि दूध देना उसका काम है या अदालत में अपनी सफाई देना।
गौरतलब है कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के कमलाकांत और प्रसन्न गोयालिनी की तरह यह गाय का विवाद अदालत तक नहीं पहुंचा। फिलहाल पुलिस की मध्यस्थता से मामला थाने में ही निपट गया। अब सवाल सिर्फ इतना है। अगली बार गाय खरीदने से पहले क्या दूध की गारंटी लिखित में ली जाएगी, या बाल्टी देखकर ही भरोसा करना पड़ेगा।
